बैंक मैनेजर के कंधो पर बैंक की शाखा को सुचारू रूप से चलाने का दायित्व होता है। वर्तमान में मनुष्य के जीवन में बैंक एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। या यूँ कहें आज के मनुष्य के जीवन में बैंक एक अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं, तो गलत नहीं होगा। बैंक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तो होते ही हैं, साथ में इनसे देश की अर्थव्यवस्था का कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं रहता है।

आज जब हर कोई वस्तु खरीदने के लिए किसी भी व्यक्ति को पैसों की जरुरत होती है, तो ऐसे में हम बैंक की सेवाओं का उपयोग किये बिना कैसे रह सकते हैं। आज भले ही हम मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग इत्यादि के जरिये घर बैठे कई काम कर सकते हैं। लेकिन इन सबके पीछे फैसिलिटेटर के रूप में बैंक ही होते हैं। यही कारण है की एक मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत बैंकिंग प्रणाली की नितांत आवश्यकता होती है। और इन बैंकों का सुचारू संचालन करने के लिए बैंक द्वारा Bank Manager को नियुक्त किया जाता है।

भारतीय बैंकिंग प्रणाली भी मजबूत हो चुकी है उसका प्रमाण तब देखने को मिला, जब सन 2008 में वित्तीय क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उथल पुथल होने के बावजूद बैंकिंग प्रणाली की आंतरिक शक्ति, अखंडता और दक्षता ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने में मदद की थी। हमारे देश भारत में बैंकिंग क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, इसलिए यह बैंक मैनेजर बनने के अवसर भी प्रदान कर रहा है।

बैंक मैनेजर अपने ऑफिस में
बैंक मैनेजर अपने ऑफिस में

कौन होता है बैंक मैनेजर

एक बैंक मैनेजर वह व्यक्ति होता है, जो किसी बैंक या किसी बैंक की विशेष शाखा का प्रभारी होता है। आम तौर पर यह व्यवसायों या व्यक्तियों को पैसा उधार देना है, या नहीं देना है के निर्णय लेने में शामिल होता है। इसके अलावा एक बैंक मैनेजर शाखा प्रभारी होने के नाते कर्मचारियों को छुट्टी देने, उनके कार्य की रिपोर्ट, प्रमोशन इत्यादि के लिए भी जिम्मेदार होता है।   

बैंक मैनेजर का पद जिम्मेदारियों से भरा हुआ होता है, और यह अपने स्थानीय समुदाय में बैंक के चेहरे के तौर पर जाना जाता है। वह ग्राहकों को ऋण देने या न देने निर्णयों के अलावा उन्हें निवेश और बचत सम्बन्धी सलाह भी देता है। एक अच्छे बैंक प्रबंधक में एक ही समय में कई काम करने की क्षमता होनी चाहिए।  

बैंक प्रबन्धक की ज़िम्मेदारियाँ

एक बैंक मैनेजर किसी बैंक शाखा का प्रमुख होता है। इसलिए यह उस शाखा विशेष के दिन प्रतिदिन के संचालन, प्रशासन, विपणन, प्रबंधन, कर्मचारियों के साथ समन्वय और समर्थन, ग्राहकों और जनता के साथ संपर्क, सिस्टम और वैधानिक नियमों का अच्छे ढंग से पालन करने के लिए जिम्मेदार होता है। उसी के नियंत्रण में शाखा में बैंक के दिशानिर्देशों और निर्देशों का पालन किया जाता है। बैंक मैनेजर की कई ज़िम्मेदारियाँ होती हैं जिनमें से कुछ की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • बैंक की सफलता के लिए रणनीति और ऑपरेशनल लोजिस्टिक विकसित करना।
  • ग्राहकों के लिए आकर्षक उत्पादों, सेवाओं का विकास करना और उनका प्रचार प्रसार करना ।
  • बैंकिंग परिचालन से सम्बंधित कई डाटाबेस बनाना और उन्हें विकसित करना।
  • ग्राहकों की शिकायतों को सुनना और उनका समाधान खोजना।
  • बैंक की शाखा के लिए नए स्टाफ को नियुक्त करना और उनको उचित प्रशिक्षण दिलाना भी Bank Manager की ही जिम्मेदारी होती है ।
  • स्थानीय समुदायों और व्यवसायों के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करना।
  • बैंक के लिए वार्षिक व्यय और बैंक को सुचारू रूप से चलाने के लिए बजट तैयार करना।
  • व्यवसायों या व्यक्तियों को ऋण देने या न देने के निर्णय में शामिल होना। 

कोई बैंक मैनेजर कैसे बन सकता है

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की बैंक मैनेजर बेहद जिम्मेदारियों से भरी हुई भूमिका होती है। तो स्वभाविक है, की बैंक प्रबंधक बनने के लिए आवश्यक दक्षता एवं शैक्षणिक योग्यता इस तरह से निर्धारित होती है। की वह व्यक्ति सर्वोत्तम तरीके से अपेक्षित कार्यों का संचालन और प्रदर्शन करने में सक्षम हो।

वैसे देखा जाय तो भारत में बैंक मैनेजर की सीधी भर्ती नहीं होती है, क्योंकि इस पद में सीधे प्रवेश नहीं किया जा सकता। लेकिन बैंक ऑफिसर के पद पर नियुक्त होने के बाद कुछ सालों का अनुभव और इन हाउस प्रशिक्षण के बाद और बैंक द्वारा अनेकों प्रासंगिक मानकों का मूल्यांकन करने के बाद बैंक किसी व्यक्ति को बैंक मैनेजर के तौर पर नियुक्त कर सकता है।

वर्तमान में भारत में बैंक मैनेजर बनने के प्रमुख दो तरीके हैं ।

  1. बैंक सहायक या लिपिक संवर्ग के कर्मचारी के तौर पर बैंक में प्रवेश करना, और फिर धीरे धीरे आंतरिक पदोन्नति के माध्यम से बैंक मैनेजर के पद तक पहुँचना।
  2. प्रोबेशनरी ऑफिसर, बैंक अधिकारी या मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर प्रवेश करना। और कुछ वर्षों की सेवा के बाद प्रबन्धक पद पर प्रगति करना।

आगे इस लेख में हम बैंक प्रबन्धक बनने के दोनों तरीकों पीओ भर्ती और आंतरिक पदोन्नति दोनों पर चर्चा करेंगे।

बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर की भर्ती

यद्यपि पीओ की भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव होते रहते हैं। लेकिन वर्तमान में प्रोबेशनरी ऑफिसर की भर्ती के लिए मुख्य दो धाराएँ अपनाई जाती हैं।

  1. बैंक कार्मिक चयन संस्थान द्वारा आईबीपीएस परीक्षा आयोजित कराई जाती हैं। जिनके माध्यम से बैंकिंग कर्मियों का सिलेक्शन किया जाता है।
  2. आईबीपीएस परीक्षा के माध्यम से कई पार्टिसिपेटिंग बैंक में बैंक कर्मचारियों की भर्ती के लिए आईबीपीएस परीक्षा आयोजित की जाती हैं।
  3. बहुत सारे बैंक जैसे भारतीय स्टेट बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंक प्रोबेशनरी ऑफिसर के लिए अलग सा एग्जाम आयोजित कराते हैं।
  4. इसके अलावा कुछ बैंक कुछ विश्वविद्यालयों के साथ चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देने के लिए गठजोड़ करते हैं। जो चयनित उम्मीदवारों को बैंकिंग में पीजी, डिप्लोमा या एमबीए जैसे कोर्स ऑफर कर रहे होते हैं। सफल उम्मीदवारों को बैंक अपने अधिकारी के तौर पर नियुक्त करते हैं।
  5. अब बात आती है प्राइवेट बैंक की, अर्थात लोग जानना चाहते हैं की वे प्राइवेट बैंक में बैंक मैनेजर कैसे बन सकते हैं। वर्तमान में नई पीढ़ी के निजी क्षेत्र के बैंक सीधी भर्ती प्रक्रिया का पालन करते हैं। वे इच्छुक उम्मीदवारों को बैंक की वेबसाइट में अपना प्रोफाइल पंजीकृत करने की सुविधा प्रदान करते हैं। और जब बैंक में वेकेंसी निकलती हैं, तब वे शोर्ट लिस्टेड उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाते हैं। और विभिन्न पदों पर भर्ती करते हैं।

बैंक ऑफिसर परीक्षा के लिए कम से कम पात्रता

बैंक प्रोबेशनरी ऑफिसर की जो परीक्षा आईबीपीएस द्वारा आयोजित की जाती हैं। उस परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार का कम से कम स्नातक होना आवश्यक है। और ऐसे बैंक जो सीधे साक्षात्कार के माध्यम से भर्ती करते हैं वे बैंकिंग और वित्त में एमबीए की भी मांग कर सकते हैं।

बैंक पीओ के लिए आयोजित आईबीपीएस परीक्षा में निम्नलिखित विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

  • मात्रात्मक रुझान की समझ (Quantitative Aptitude)
  • अंग्रेजी की समझ (English Comprehension)
  • रीजनिंग
  • बैंकिंग सम्बन्धी सामान्य जागरूकता
  • कंप्यूटर की मुलभुत बातें

आप चाहें तो आईबीपीएस की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी प्रोबेशनरी ऑफिसर और मैनेजमेंट ट्रेनी की सामान्य भर्ती प्रक्रिया के बारे में और अधिक जान सकते हैं।

इस तरह की परीक्षा का विज्ञापन सभी प्रमुख समाचार पत्रों, रोजगार समाचार पत्रों, बैंक की वेबसाइट और आईबीपीएस वेब साइट पर घोषित किये जाते हैं। इनके अलावा कई जॉब पोर्टल भी इस तरह की परीक्षाओं का लिंक प्रदर्शित करते हैं।

ऑफिसर के तौर पर ज्वाइन होने के बाद बैंक मैनेजर कैसे बनें 

अधिकांश बैंकों में बैंक के प्रोबेशनरी ऑफिसर यानिकी पीओ को विभिन्न केन्द्रों और विभागों में नौकरी का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। ताकि उन्हें बैंकिंग के सामान्य पहलुओं से पूरी तरह अवगत कराया जा सके। उसके बाद उन्हें स्वतन्त्र रूप से कनिष्ठ प्रबंधन स्केल या सहायक प्रबंधकों के रूप में किसी अनुभाग या विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।   

कुछ बैंक ट्रेनिंग खत्म होने के बाद या प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद पदोन्नति परीक्षा आयोजित कराते हैं। परीक्षा में हासिल प्रदर्शन के दौरान के अनुसार जूनियर मैनेजमेंट स्केल Ist और स्केल II2nd में पदोन्नत किया जाता है।

बैंक शाखाओं को भी Ist और स्केल II2nd इत्यादि में वर्गीकृत किया गया है। बैंक द्वारा आयोजित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले और अपने कार्य को बेहतर करने वाले बैंक अधिकारीयों को सम्बंधित ग्रेड शाखाओं में बैंक मैनेजर के तौर पर तैनात किया जा सकता है।

बैंक प्रबंधकों का पारिश्रमिक

बैंक मैनेजर को मिलने वाले पारिश्रमिक की बात करें तो पुराने प्राइवेट सेक्टर के बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एक अच्छे वेतन वाली संरचना विद्यमान है। वेतन के अलावा अन्य भी कई लाभ होते हैं। वेतन और अन्य लाभों को बैंक और अधिकारीयों के सदस्य, ट्रेड यूनियन भारतीय बैंक संघ इत्यादि भारत सरकार, बैंकिंग विभाग, वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत करते हैं और बैंकिंग कर्मियों के लिए एक निर्धारित वेतन और अन्य लाभ सुनिश्चित करते हैं ।  

यद्यपि एक बैंक मैनेजर को मिलने वाले अतिरिक्त लाभों की संख्या बहुत अधिक नहीं है। इन्हें इनके ग्रेड पे के अनुसार वेतन मिलता है, और कभी कभी यदि सम्बंधित बैंक की शाखा का अच्छा प्रदर्शन रहा तो उन्हें इंसेंटिव के तौर पर कुछ प्रतिशत नकद राशि प्रदान की जाती है।

आईबीपीएस परीक्षा के माध्यम से बने बैंक अधिकारी की शुरूआती वेतन रूपये 60000 प्रति माह हो सकता है । जो आगे अनुभव के आधार पर 8-15 लाख प्रति वर्ष तक बढ़ सकता है।

बैंक प्रबंधकों का कैरियर  

यह जरुरी नहीं है की जो बैंक मैनेजर बन गया, उसके लिए आगे बढ़ने के रस्ते बंद हो गए। या फिर बैंक प्रबंधक बनना ही उसकी अंतिम सीढ़ी है। बल्कि व्यक्ति चाहे तो किसी बैंक का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तक बन सकता है। वर्तमान में जो टॉप बैंकिंग एग्जीक्यूटिव हैं, उन्होंने  अपने कैरियर की शुरुआत स्केल Ist से ही की थी। वे सर्वप्रथम जूनियर मैनेजमेंट स्केल में शामिल हुए, उसके बाद मिडिल मैनेजमेंट स्केल में और आज वे टॉप मैनेजमेंट स्केल में शामिल हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंक मैनेजर को प्रबंधक, वरिष्ठ प्रबंधक, मुख्य प्रबंधक और सहायक महाप्रबंधक के तौर पर नियुक्त हो सकते हैं। उसके बाद अपनी कार्यकुशलता, दक्षता और अनुभव के आधार पर क्षेत्रीय प्रबंधक, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक इत्यादि पदनामों की ओर प्रगति कर सकते हैं।

टॉप मैनेजमेंट स्केल में उन्हें उप महाप्रबंधक, महाप्रबंधक के तौर पर नियुक्ति मिल सकती है। बैंक मैनेजर जनरल मैनेजर बनने के बाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्ष के रूप में, कार्यकारी निदेशक के रूप में, बैंकों के प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त हो सकते हैं। यही से उन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सहित कई अन्य नियुक्तियों का अवसर प्राप्त होता है।

समाज में हो रहे बदलाव और पर्यावरणीय कारकों के साथ तालमेल बिठाते हुए, बैंकों ने अपनी पदोन्नति नीतियों की समय समय पर समीक्षा की, और उनमें जरुरी बदलाव भी किये हैं । अब उच्च क्षमता, दक्षता, मेहनती और अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंक मैनेजर बड़ी जल्दी पदोन्नति पा सकते हैं।

निष्कर्ष

बैंक मैनेजर की नौकरी एक बहुत अच्छी नौकरी है। लेकिन अन्य क्षेत्रों की तरह यह भी सबके लिए नहीं है। एक सफल Bank Manager बनने के लिए किसी इच्छुक व्यक्ति के पास उचित कौशल , और वित्तीय सिस्टम का ज्ञान होना नितांत आवश्यक है।

इसके अलावा इच्छुक व्यक्ति को कई तरह की परीक्षाएं जो भारतीय बैंक संघ, बैंक कार्मिक प्रबंधन संस्थान (आईबीपीएम) द्वारा आयोजित की जाती हैं में उत्तीर्ण होने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों जैसे वाणिज्य मंडलों, निर्यात परिषदों और विभिन्न आंतरिक प्रशिक्षणों द्वारा संचालित विशिष्ट पाठ्यक्रम और प्रशिक्षणों को भी पूर्ण करना होता है।

एक बैंक मैनेजर के पास उसी बैंक के अन्य प्रबंधकों या उस एरिया में स्थापित बैंकों के प्रबंधकों का एक स्थापित नेटवर्क भी होना चाहिए। उसे प्रबंधन संघों और प्रबंधन क्लबों में सकारात्मक रूप से भाग लेने की भी आवश्यकता हो सकती है। इस तरह की गतिविधियाँ बैंक मैनेजर को बैंक का विकास करने में मदद कर सकती हैं।

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