BSNL सार्वजनिक क्षेत्र की टेलिकॉम कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। लेकिन इसके शुरूआती दिनों को छोड़ दिया जाय तो, बाद में यह टेलिकॉम कंपनी अन्य निजी टेलिकॉम कम्पनियों से पिछड़ती चली गई। लेकिन बीच बीच में सरकार द्वारा इसे पैकेज प्रदान किये गए, जिसके कारण इस कंपनी का अस्तित्व आज भी बना हुआ है।

एक तरफ जहाँ देश की नामी गिरामी निजी क्षेत्र की टेलिकॉम कंपनियाँ देश में चल रहे 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में हिस्सा लेकर बढ़ चढ़कर बोलियाँ लगा रही हैं। वहीँ सार्वजनिक क्षेत्र की टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल कंगाली की कगार पर खड़ी है। कहने का आशय यह है की देश में चल रहे 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में निजी क्षेत्र की टेलिकॉम कंपनियाँ जैसे जिओ, एयरटेल, आईडिया – वोडाफोन एवं अडानी इंटरप्राइजेज बढ़ चढ़कर बोलियाँ लगा रही हैं।

आज गुरुवार को इस नीलामी का तीसरा दिन है, और पहले दिन 1.45 लाख करोड़ की बोली और दुसरे दिन 1.49 लाख करोड़ की बोली लग चुकी हैं।

bsnl will launch 4g services soon

रिवाइवल पैकेज को लेकर चर्चा में है BSNL

देश में जब 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी चल रही हैं, इस समय एक ज़माने में सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल भी चर्चा का विषय बनी हुई है। बीएसएनएल का चर्चा में होने का कारण यह है की भारत सरकार ने इसके लिए 1.64 लाख करोड़ के पुनरुद्धार पैकेज को मंजूरी दे दी है । इस पैकेज में बीएसएनएल के साथ MTNL भी शामिल है।

जानकारी के मुताबिक आज से तीन साल पहले यानिकी 2019 में भी सरकार ने बीएसएनएल को 70000 करोड़ रूपये की रिवाइवल पैकेज की घोषणा की थी। लेकिन इसके बावजूद कंपनी बार बार कंगाली की स्थिति में पहुँच जाती है। लेकिन अब की बार हो सकता है की बीएसएनएल का पुनरुत्थान करने के लिए सरकार के पास कोई प्रभावी योजना हो। तभी तो सरकार ने इतने बड़े रिवाइवल पैकेज को मंजूरी दी है।

वो भी समय था जब बीएसएनएल की सिम बहुत चलती थी  

देश में बीएसएनएल की मोबाइल सेवा की शुरुआत 19 अक्टूबर 2002 को हुई थी। उस समय बीएसएनएल का सिम प्राप्त करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। बताया जाता है की उस समय बीएसएनएल की सिम प्राप्त करने के लिए लोग तीन चार किलोमीटर की लम्बी लाइनों में लगकर इंतजार करते थे। शायद यही कारण था की शुरू होने के कुछ ही समय पश्चात बीएसएनएल देश की नंबर 1 टेलिकॉम कंपनी बन गई थी।

लेकिन आज बीएसएनएल अन्य टेलिकॉम कंपनियों से काफी पीछे हो चुकी है। जहाँ अन्य टेलिकॉम कंपनियाँ 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में शामिल हैं, वहीँ बीएसएनएल आज तक 4G की सेवाएँ तक लांच नहीं कर पाई हैं।

बीएसएनएल के पिछड़ने के कारण

यद्यपि एक कंपनी को कुशलतापूर्वक प्रॉफिट के साथ चलाना एक कुशल नेतृत्व की निशानी होती है। बीएसएनएल के पिछड़ने के कई कारण हैं लेकिन इनमें लाल फीताशाही भी है। इसके अलावा कंपनी के हर निर्णय में सरकारी दखल होना भी इसका पिछड़ने का बड़ा कारण है। जिस समय बीएसएनएल की स्थापना की गई थी, उस समय इसमें 100% सरकार की हिस्सेदारी थी।

इसलिए इस कंपनी में सरकारी दखल बहुत अधिक था, और या भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के नियंत्रण में काम करती थी। कहा जाता है की कंपनी को समय पर सरकारी मंजूरी न मिलने के कारण इसके कई काम अधूरे रहते थे। और सरकारी कंपनी होने के कारण इसे हमेशा से 3G, 4G स्पेक्ट्रम इत्यादि की नीलामीयों से इसे दूर रखा जाता था। यही कारण है की आज तक कंपनी अपना 4G लांच नहीं कर पाई थी।

जानकारी के मुताबिक इस कंपनी में 2006-2012 तक बहुत ज्यादा लाल फीताशाही देखने को मिली। इस कंपनी के टेंडर पूरे होने में भी महीनों का समय लग जाता था, जिससे कंपनी की बाज़ार हिस्सेदारी में काफी गिरावट दर्ज की गई थी। यही कारण था की इस कंपनी से निजी टेलिकॉम कंपनियाँ आगे निकल गई।

उसके बाद ग्राहकों को भी नेटवर्क समस्याओं सहित कई अन्य समस्याएं होने लगी तो उन्होंने धीरे धीरे निजी टेलिकॉम कंपनियों का रुख कर लिया। और इस तरह से कंपनी और पीछे पीछे होती गई।

बीएसएनएल का पुनरुत्थान कैसे होगा    

भारत सरकार द्वारा बीएसएनएल के पुनरुत्थान की योजना बना ली गई है। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक सरकार द्वारा बीएसएनएल को 4G स्पेक्ट्रम आवंटित करने की योजना है। 900/1800 मेगाहर्टज बैंड में इक्विटी निवेश के जरिये स्पेक्ट्रम का आवंटन करने की योजना है जिसकी लागत लगभग 44993 करोड़ रूपये होगी।

जानकारी के मुताबिक बीएसएनएल कंपनी दिसम्बर महीने तक अपनी 4G सेवाएँ लांच कर सकती हैं। बीएसएनएल का पुनरुत्थान को तीन भागों में विभाजित किया गया है। इसमें सबसे पहले कंपनी की सेवाओं में सुधार करना शामिल है, दूसरा कंपनी के बही खातों को मजबूती प्रदान करना है और तीसरा कंपनी अपने फाइबर नेटवर्क में विस्तार करेगी यह शामिल है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार करने के लिए कंपनी के वैधानिक बकाया जिसकी राशि लगभग 33000 करोड़ रूपये है, उसे इक्विटी में बदला जाएगा और बैंक कर्जों का भुगतान के लिए कंपनी इतनी ही राशि के बांड जारी कर सकती है।

बीएसएनएल के जरिये ग्रामीण इलाकों तक पहुंचेगा 4G

सरकार की योजना बीएसएनएल के माध्यम से भारत के दूर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों तक 4G की सेवाएँ पहुँचाने की है। इसके लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस परियोजना को मंजूरी भी मिल गई है, और बताया जा रहा है, की इस परियोजना पर लगभग 26316 करोड़ रूपये की लागत संभावित है, जिसेयूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फण्ड के माध्यम से किया जाएगा।  

इसके अलावा भारत सरकार की कैबिनेट ने बीएसएनएल और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) के विलय को भी मंजूरी दे दी है। BBNL का विलय अब बीएसएनएल में हो जाएगा, और ऑप्टिकल फाइबर का वह पूरा कण्ट्रोल जिसमें BBNL ने 5.67 लाख किलोमीटर तक ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछानी थी, उसका पूरा नियंत्रण बीएसएनएल के हाथों में आ जाएगा।

यह भी पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published