Chit Funds -चिट फण्ड क्या है प्रकार, फायदे, नुकसान एवं कार्यप्रणाली ।

Chit Funds के बारे में शायद आप सबने अपने जीवन में कभी न कभी सुना होगा क्योंकि बीते कुछ वर्षों में यह समाचार पत्रों की सुर्ख़ियों में इसलिए रहे हैं की इन Chit Funds के माध्यम से अनेकों लोगों के साथ दगाबाजी की गई और चिट फण्ड आयोजकों द्वारा बिना निवेशकों का पैसा लौटाए कंपनियां बंद कर दी गई । यही कारण है की लोग अपनी खून पसीने की कमाई को निवेश करने से पहले Chit Funds के बारे में जानने के इच्छुक रहते हैं । यद्यपि इस प्रकार के निवेश को निवेश की दृष्टी से सुरक्षित नहीं माना जाता है लेकिन ऐसे लोग जिन्हें वित्तीय संस्थानों जैसे बैंकों इत्यादि से ऋण मिलने में परेशानी होती है वे अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर Chit funds में निवेश करते हैं । और बहुत सारे लोग इसके माध्यम से अपनी वित्तीय आवश्यकता की पूर्ति कर भी लेते हैं लेकिन कुछ मामलों में लोग धोखे का शिकार हो जाते हैं । लेकिन इसके बावजूद इस प्रकार की यह स्कीमें भारत में बेहद प्रचलित एवं प्रसिद्ध स्कीमें हैं क्योंकि एक Chit Funds बचतकर्ता एवं उधारकर्ता दोनों को एक ही मंच पर ले आता है । इसलिए पैसे बचत करने का यह एक अच्छा माध्यम है लेकिन इसमें धोखे से बचने की नितांत आवश्यकता होती है । इसलिए आज हम इस लेख के माध्यम से Chit Funds क्या होते हैं? कैसे काम करते हैं? और निवेश से पहले क्या सावधानियाँ अपनाई जा सकती हैं इत्यादि के बारे में जानने की कोशिश करेंगे ।

चिट फण्ड क्या हैं (What are Chit Funds in Hindi):

Chit funds को हम एक वित्तीय साधन के रूप में देख सकते हैं लेकिन जहाँ तक इसकी परिभाषा की बात है वह अलग अलग लोगों के आधार पर अलग अलग हो सकती है । कहने का आशय यह है की कुछ लोग इसे पैसे डिपाजिट करने की स्कीम के रूप में देखते हैं तो कुछ लोग इसे बचत एवं निवेश स्कीम के तौर पर देखते हैं । कुछ लोग ऐसे भी हैं जो Chit funds को लोन या क्रेडिट स्कीम के तौर पर भी देखते हैं । दूसरे शब्दों में इसे एक वित्तीय समझौता भी कहा जा सकता है जो निश्चित संख्या के  लोगों के एक समूह के बीच होता है । इसमें लोगों की एक निश्चित संख्या को निश्चित अवधि के लिए एक निश्चित राशि का भुगतान किश्तों में करना होता है । इस स्कीम में शामिल प्रत्येक व्यक्ति उसकी बारी आने पर प्राइज अमाउंट जो भी समझौते के दौरान निर्धारित हुआ होगा पाने का अधिकारी होता है । संक्षेप में हम Chit Funds को बचत एवं उधार योजना कह सकते हैं क्योंकि इस स्कीम के अंतर्गत सभी सदस्यों द्वारा समझौते के तहत एक निश्चित धनराशि एक निश्चित अवधि के लिए जमा की जाती है । इस प्रकार हर माह जमा राशि नीलामी के माध्यम से जरूरतमंद व्यक्ति को दे दी जाती है । कहने का अभिप्राय यह है की प्रत्येक महीने जमा धनराशि को अलग अलग जरुरत मंदों को दे दिया जाता है और यह सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक की सभी सदस्यों को एक बार पूरी धनराशि मिल न गई हो ।

चिट फण्ड के प्रकार (Types of Chit fund in India):

भारत में चिट फण्ड को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है ।

राज्य सरकार द्वारा चालित चिट फण्ड:

इस तरह के यह फण्ड राज्य सरकार द्वारा संचालित होते हैं इस प्रकार के यह फण्ड पूरी तरह से पारदर्शी होते हैं । विभिन्न राज्यों में अलग अलग नाम से अनेक संस्थाएं क्रियान्वित हैं ।

प्राइवेट रजिस्टर चिट फण्ड:

भारत में बहुत सारी प्राइवेट तौर पर रजिस्टर चिट फण्ड हैं ये सभी चिट फण्ड अधिनियम 1982 के तहत पंजीकृत हैं ।

अपंजीकृत चिट फण्ड:

हालांकि इस प्रकार के Chit Funds चलाना क़ानूनी रूप से जुर्म है अर्थात इस प्रकार के यह चिट फण्ड अवैध रूप से चलाये जाते हैं । लेकिन इसके बावजूद भी देश भर में अनेकों अपंजीकृत चिट फण्ड देखने को मिल जायेंगे । इस प्रकार के ये फण्ड पड़ोसियों, रिश्तेदारों, दोस्तों इत्यादि समूहों द्वारा चलाये जाते हैं ।

चिट फण्ड कैसे काम करते हैं (How Chit Funds Works):

Chit Funds के शुरू होने के बाद इसे प्राधिकरण के साथ पंजीकृत करना होता है और सुरक्षा राशि के तौर पर 100% चिट जमा करना होता है । मान लीजिये की एक चिट फण्ड तीस सदस्यों के साथ शुरू होता है जिसमे प्रति माह प्रत्येक सदस्य 10000 रूपये का योगदान देता है । तो इस स्थिति में कुल जमा राशि इस प्रकार से होगी ।

30 लोग × रूपये 10000 = 300000 रूपये

एक समूह में सभी सदस्यों द्वारा एकत्रित की गई राशि को पॉट कहा जाता है जब इस तरह का यह अमाउंट एकत्रित कर दिया जाता है तो इसे नीलामी के लिए सदस्यों के बीच रखा जाता है । इस प्रक्रिया में जो ग्राहक सबसे कम राशि लेने के लिए मंजूर हो जाता है उसे पुरुस्कार राशि अर्थात पॉट राशि मिल जाती है । मान लीजिये की पहले महीने सबसे कम बोली लगाने वाले सदस्य की बोली कुल जमा राशि का 70% थी इस स्थिति में उस सदस्य को 3 लाख का 70% यानिकी 210000रूपये दे दिए जायेंगे । उसके बाद बचे हुए पैसे यानिकी 90000 का वितरण इस प्रकार से हो सकता है । इसमें यह मान के चलते हैं की Chit Funds शुरू करने वाले व्यक्ति द्वारा 5% कमीशन लिया जाता है तो इस स्थिति में 3 लाख का 5% पन्द्रह हज़ार काट लेने के बाद केवल 75000 रूपये बचते हैं इन पैसे को तीस सदस्यों में 2500 रूपये प्रति सदस्य के आधार पर बाँट दिया जायेगा । इस हिसाब से पहले महीने के लिए एक सदस्य द्वारा दिया गया पैसा 10000 न होकर 7500 रूपये होगा । यह नीलामी हर महीने तब तक इसी तरह जारी रहेगी जब तक हर सदस्य को प्राइज अमाउंट मिल नहीं जाता, जिसे एक बार प्राइज अमाउंट मिल जाता है उसे अगले महीने नीलामी से बाहर रखा जाता है । ताकि एक एक करके सभी सदस्यों की बारी आ सके ।

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चिट फण्ड के फायदे (Advantage of Chit Funds in Hindi):

Chit Funds के कुछ मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं ।

  • चिट फण्ड लोगों को बचत करने एवं उधार लेने के लिए फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करता है ।
  • Chit Funds के माध्यम से व्यक्ति को पहली किश्त चूका देने के बाद ही उधार लेने का मौका मिल सकता है ।
  • जरूरतमंद लोगों के लिए वित्त की व्यवस्था करने का यह एक अच्छा विकल्प है क्योंकि इस प्रक्रिया में उधार लेने के लिए किसी दस्तावेज जैसे इनकम टैक्स रिटर्न, पैन कार्ड इत्यादि की आवश्यकता नहीं होती है ।
  • जिन्होंने नीलामी के माध्यम से पैसे न लिए हों ऐसे सदस्यों को अंत तक लाभांश का हिस्सा मिलता है जो अन्य जमा योजनाओं के माध्यम से मिलने वाले ब्याज की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक होता है ।
  • नीलामी में मिलने वाली रकम को पाने के लिए सदस्य को यह बताने की आवश्यकता नहीं होती है की वह इस रकम का उपयोग कहाँ करेगा ।

चिट फण्ड के नुकसान (Disadvantages of Chit funds in Hindi):

चिट फण्ड के कुछ मुख्य नुकसानों की लिस्ट इस प्रकार से है ।

  • इसमें निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं है ।
  • इसमें धोखाधड़ी की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं जैसे मान लीजिये यदि Chit Funds स्टार्ट करने वाला व्यक्ति अमाउंट के साथ भाग जाए इत्यादि ।
  • बोली जीतने के बाद जीते हुए सदस्य को अन्य नीलामी में बोली लगाने का मौका नहीं दिया जाता है ।
  • बोली जीतने के बाद हो सकता है की सदस्य किस्तों का भुगतान करने के लिए राजी न हो ।
  • Chit Funds में सुरक्षा कम जोखिम ज्यादा होता है ।

चिट फण्ड में निवेश करने से पहले सावधानियाँ:

चूँकि Chit Funds में निवेश करना जोखिमभरा हो सकता है इसलिए इनमें निवेश करने से पहले विभिन्न सावधानियाँ अपनाई जा सकती हैं ।

  • चिट फण्ड में निवेश करने से पहले यह अवश्य चेक कर लें की वह रजिस्टर है या नहीं इसके लिए आप कंपनी का इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट चेक कर सकते हैं ।
  • जहाँ चिट फण्ड संचालित हो रहा हो उस राज्य के चिट फण्ड रजिस्ट्रार द्वारा जारी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट चेक कर सकते हैं ।
  • Chit Funds में निवेश करने से पहले प्रमोटर की डिटेल चेक कर लें प्रमोटर आर्थिक रूप से मजबूत होना चाहिए ।
  • निवेशक को चाहिए की वह उस चिट फण्ड के बारे में राज्य चिट फण्ड रजिस्ट्रार से पता करे की कहीं उसके खिलाफ कोर्ट इत्यादि में कोई शिकायत तो पंजीकृत नहीं है ।
  • चिट फण्ड स्टार्ट कर रहे व्यक्ति के कमीशन को चेक करें और कम कमीशन वाले चिट फण्ड में निवेश करें ।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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