भारतीय खान पान में मसालों की महत्वता एवं इनके योगदान को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता हींग यानिकी Compounded Asafoetida भी लोकप्रिय भारतीय मसालों में से एक है। भारतीय खाने में इस्तेमाल में लाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के मसाले मनुष्य के शरीर को रोगों से लड़ने एवं उन्हें रोगमुक्त होने में मदद करते हैं। हींग भी एक ऐसा ही मसाला है जो केवल अपने स्वाद के कारण ही लोकप्रिय नहीं है बल्कि इससे होने वाले औषधीय लाभों के लिए भी यह लोकप्रिय है।

हालांकि हमारे देश भारत वर्ष में इसे बनाने में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की भारी कमी है और भारत अपनी इस कमी को ईरान एवं अफगानिस्तान जैसे देशों से इसका आयात करके पूरी करता है। हींग की दो मुख्य किस्में पायी जाती हैं इनमें एक सफ़ेद हींग जिसे काबुली सुफेड भी कहते हैं और दूसरा लाल हींग प्रमुख है। हींग की प्रकृति तीखी एवं कड़वी होती है और चूँकि इसमें सल्फर के यौगिक मौजूद होते हैं इसलिए इससे बहुत कठोर बदबूदार तीखी गंध का उत्सर्जन होता है।

 इसकी जो सफ़ेद एवं पीली किस्में होती हैं वे पानी में घुलनशील होती हैं, जबकि लाल एवं काले रंग की किस्में तेल में घुलनशील होती हैं। शायद यही कारण है की Compounded Asafoetida यानिकी हींग की इसके वास्तविक गंध एवं कठोर स्वाद के साथ पसंद नहीं किया जाता है इसलिए इसे प्रसंस्कृत करके स्टार्च एवं गोंद इत्यादि के साथ बेचा जाता है। वर्तमान में बाज़ारों में हींग पाउडर एवं टेबलेट स्वरूप में भी बिकने के लिए उपलब्ध है।

भारतीय घरेलु बाजार में गुणवत्तायुक्त मिश्रित हींग की मांग तो है ही है साथ में विदेशों जैसे यूके, यमन, बेल्जियम, केन्या, मलेशिया, ओमान, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात इत्यादि देशों में भी इसकी अच्छी खासी मांग है। इसलिए आज इस लेख के माध्यम से हम हींग बनाने यानिकी Compounded Asafoetida के व्यवसाय के बारे में विस्तृत तौर पर वार्तालाप करने वाले हैं।

Compounded Asafoetida Manufacturing
Compounded Asafoetida

हींग बनाने का बिजनेस क्या है (What is Compounded Asafoetida Manufacturing Business)

हींग की यदि हम बात करें तो यह एक पौधा होता है जिसमें तेज गंध एवं कठोर स्वाद होता है। और इसमें अनेकों औषधीय गुण भी विद्यमान रहते हैं यही कारण है की इसका इस्तेमाल अनेकों सौन्दर्य प्रसाधनों में सुगन्ध देने के लिए तो खाद्य एवं पेय पदार्थों में स्वाद की बढ़ोत्तरी के लिए किया जाता है। और भारतीय खाने में ऐसे बहुत सारे व्यंजन हैं जिन्हें बनाने में हींग का इस्तेमाल एक प्रमुख मसाले के तौर पर किया जाता है।

इसलिए जब किसी उद्यमी द्वारा कच्चे हींग में स्टार्च या गोंद मिलाकर इसे स्वादिष्ट एवं मसाले के तौर पर इस्तेमाल में लाये जाने योग्य बनाया जाता है। तो उस उद्यमी द्वारा किया जाने वाला यह काम हींग बनाने का व्यापार या CompoundedAsafoetida Manufacturing Business कहलाता है।

हींग बनाने का व्यवसाय क्यों करना चाहिए

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की भारत में Compounded Asafoetida बनाने के लिए कच्चा माल ईरान एवं अफगानिस्तान से आयात किया जाता है इसलिए यहाँ ईरानी हींग एवं पठानी हींग काफी प्रसिद्ध है। ईरानी हींग भी कई किस्में जैसे ईरानी रस, ईरानी खड़ा काफी प्रसिद्ध है और पठानी हींग की यदि हम बात करें तो इसमें चरस, चरसड्डा, गैलमिन, हाडा, काबुली, खरल, शबंदी इत्यादि ब्रांड शामिल हैं। मिश्रित हींग के पाउडर एवं टिकियों का इस्तेमाल भारतीय खाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की शुद्ध हींग को इसकी तीखी गंध एवं कठोर स्वाद के चलते पसंद नहीं किया जाता है इसलिए इसे मिश्रित यानिकी Compounded Asafoetida के स्वरूप में बेचा जाता है। विभिन्न स्वदेशी फर्म ऐसी भी हैं जो गांठ के रूप में हींग का निर्माण कर इन्हें बाज़ारों में बेच रही हैं। लेकिन इन सबके बावजूद हींग की उपलब्धता, स्टोरेज, गुणवत्ता में सुधार इत्यादि की बेहद आवश्यकता है । लेकिन इसके बावजूद भी व्यक्ति चाहे तो हींग बनाने का बिजनेस शुरू कर सकता है क्योंकि इस उत्पाद की कुछ विशेषताएं हैं जो निम्नलिखित हैं।

  • यह उत्पाद एक ऐसा उत्पाद है जिसकी प्रसंस्करण तकनीक एवं संचालन बेहद आसान है और इसे लम्बी अवधि के लिए स्टोरेज भी किया जा सकता है।
  • Compounded Asafoetida नामक यह उत्पाद नमी एवं वाष्पशील तेल सामग्री इत्यादि में एक समान है।
  • इसका निर्माण पीएफए विनिर्देशों के अनुरूप आसानी से किया जा सकता है।
  • इसका इस्तेमाल सुविधाजनक रूप से किया जा सकता है।

चाहे भारत का घरेलु बाजार हो या फिर विदेशी बाजार दोनों में Compounded Asafoetida यानिकी मिश्रित हींग की अच्छी खासी मांग है। हालांकि मिश्रित हींग की घरेलू बाजार में सटीक एवं वास्तविक कितनी माँग है इसका अनुमान लगाना थोड़ा कठिन है लेकिन भारत मिश्रित हींग को यमन, बेल्जियम, केन्या, मलेशिया, ओमान, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात एवं अन्य देशों को निर्यात करता है।

घरेलू बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली हींग की कीमत बहुत अधिक यहाँ तक 300 से 1000 रूपये किलो के बीच है। इसलिए कहा जा सकता है की Compounded Asafoetida Manufacturing Business शुरू करके उद्यमी न सिर्फ घरेलु बाजार में बल्कि विदेशी बाज़ारों में भी अपने उत्पाद को बेच सकता है।

हींग बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start Compounded Asafoetida Manufacturing Business)

वैसे देखा जाय तो हींग बनाने की तकनीक एवं इसे संचालन करने की प्रक्रिया बेहद आसान है इसलिए इस व्यवसाय को कोई भी शुरू कर सकता है। लेकिन साथ में उद्यमी को यह भी समझना होगा की हमारे देश भारत में इसे बनाने में इस्तेमाल में लाये जाने वाला कच्चा माल यानिकी शुद्ध हींग अधिकतर बाहर देशों जैसे ईरान एवं अफगानिस्तान से आयात किया जाता है।

और यहाँ इसके भण्डारण की भी उचित व्यवस्था नहीं है इसलिए कच्चे माल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती Asafoetida Manufacturingमें उभरकर सामने आ सकती है। इसके बावजूद भी यदि कोई व्यक्ति इस तरह का बिजनेस शुरू करना चाहता है तो आगे इस लेख में हम स्टेप बाई स्टेप इसी के बारे में वार्तालाप करने का प्रयत्न कर रहे हैं।  

1. स्थानीय स्तर पर रिसर्च करें

हींग बनाने का बिजनेस यानिकी Compounded Asafoetida बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए उद्यमी को सर्वप्रथम जिस एरिया में वह यह व्यवसाय शुरू करना चाहता हो वहां पर रिसर्च करनी अति आवश्यक है। इसके लिए उद्यमी को उस एरिया में हींग की मांग का जायजा लेना होगा और फिर अपनी कम से कम बिक्री का भी जायजा लेना होगा जो उसे उसके व्यवसाय को बनाये रखने के लिए बेहद जरुरी है। अब अगला प्रश्न यह आता है की क्या उस एरिया में मौजूद हींग की माँग उसके व्यवसाय को बनाये रखने के लिए पर्याप्त है?

इसके अलावा मिश्रित हींग बनाने के लिए कच्चे माल को साल भर बनाये रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है इसलिए उद्यमी को उस एरिया में उपलब्ध कच्चे माल के सप्लायर से इस बारे में बात करने की आवश्यकता हो सकती है की क्या वह साल भर कच्चे माल की उपलब्धता बनाये रखने में सफल हो पायेगा।    

2. जगह का प्रबंध करें (Land & Building for Compounded Asafoetida Manufacturing)

यद्यपि इसमें कोई दो राय नहीं है की किसी भी बिजनेस के लिए लोकेशन की तलाश करना सबसे प्रमुख एवं जरुरी कार्य होता है। क्योंकि अधिकतर व्यवसाय ऐसे होते हैं जो उनकी लोकेशन की बदौलत ही सफलता का स्वाद चख रहे होते हैं। हालांकि जहाँ तक बात Compounded Asafoetida की है इसके लिए उद्यमी को ऐसी लोकेशन चाहिए होती है जहाँ सभी प्रकार की आधरभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी सड़कों इत्यादि का उचित प्रबंध हो।

और इसके लिए 500 Square Feet जगह काफी रहेगी और जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं लोकेशन ऐसी होनी चाहिए जहाँ से उत्पादित उत्पाद को टारगेट मार्किट तक आसानी से पहुँचाया जा सके। और आवश्यक कच्चा माल भी आसानी से ख़रीदा जा सके।     

3. आवश्यक लाइसेंस एवं पंजीकरण कराएँ

हींग बनाने का बिजनेस खाद्य से जुड़ा हुआ व्यवसाय है इसलिए व्यवसायिक तौर पर इसका निर्माण करने के लिए तरह तरह के लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो सकती है। यदि कई मामलों में राज्य के आधार पर लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन सम्बन्धी नियम अलग भी हो सकते हैं। इसलिए Compounded Asafoetida व्यवसाय करने वाले उद्यमी को स्थानीय नियम एवं कानूनों के बारे में अवश्य पता करना चाहिए। कुछ की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • सबसे पहले उद्यमी को अपने व्यवसाय को वैधानिक स्वरूप प्रदान करना होगा इसके लिए वह अपने व्यवसाय को प्रोप्राइटरशिप के तौर पर रजिस्टर करा सकता है।
  • यद्यपि एक निश्चित टर्नओवर की सीमा तक जीएसटी रजिस्ट्रेशन में छूट होती है लेकिन उद्यमी चाहे तो टैक्स रजिस्ट्रेशन पहले ही करा सकता है।
  • स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम, ग्राम पंचायत इत्यादि से ट्रेड लाइसेंस लेने की आवश्यकता हो सकती है।
  • चूँकि यह खाद्य पदार्थ है इसलिए फ़ूड लाइसेंस की भी आवश्यकता होगी।
  • उद्यमी चाहे तो उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन भी करा सकता है।          

4. मशीनरी एवं कच्चे माल का प्रबंध करें

वैसे देखा जाय तो इस व्यवसाय के लिए मशीनरी एवं उपकरणों का चयन इस बात पर निर्भर करेगा की उद्यमी के व्यवसाय का आकार क्या होगा? अर्थात उद्यमी केCompounded Asafoetida प्लांट की उत्पादन क्षमता क्या होगी। क्योंकि इस व्यवसाय में विभिन्न प्रकार की मशीनरी एवं उपकरण इस्तेमाल में लाये जाते हैं। इसलिए मशीनरी का चयन उद्यमी उत्पाद की मांग एवं अपने बजट के अनुरूप कर सकता है वैसे शुरूआती स्तर पर कम बजट के साथ ही इस तरह के व्यवसाय को शुरू करना उचित हो सकता है। कुछ प्रमुख मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट निम्नवत है।

  • मिक्सर ग्राइंडर
  • मिलिंग मशीन
  • टेबलेट मेकिंग मशीन
  • पैकेजिंग मशीन 

उद्यमी सप्लायर का चुनाव ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी मोड के माध्यम से कर सकता है। जहाँ तक कच्चे माल की बात है इसके लिए शुद्ध ईरानी या पठानी हींग की आवश्यकता होती है। जिसे उद्यमी पाउडर, टेबलेट या फिर गाँठ स्वरूप में तैयार करके देशी एवं विदेशी बाज़ारों में बेच सकता है।     

5. निर्माण शुरू करें और बेचें  (Start  Compounded Asafoetida Manufacturing)

Compounded Asafoetida Manufacturing  में सर्वप्रथम हींग के पेस्टी मास को पानी में भिगोने की आवश्यकता होती है। उसके बाद इस प्रक्रिया में मिक्सर ग्राइंडर का इस्तेमाल करके आवश्यक अनुपात में अन्य सामग्री जैसे स्टार्च एवं गोंद को मिलाया जाता है। फिर इसमें भीगी हुई हींग के घोल को डालकर अच्छी तरह मिलाना होता है। उसके बाद इस मिश्रित हींग को मिलिंग मशीन की मदद से पाउडर स्वरूप में बनाया जाता है।  वैसे आम तौर पर देखा गया है की हींग पाउडर स्वरूप में ही बाज़ारों में अधिक बिकती है लेकिन आप चाहें तो इसे टेबलेट एवं गाँठ स्वरूप में भी बनाकर बेच सकते हैं।

उसके बाद हींग को पैक करके बाजार में बेचने के लिए उतरा जा सकता है। अपने उत्पाद को बेचने के लिए उद्यमी स्थानीय रिटेलर से संपर्क कर सकता है और उन्हें अच्छी मार्जिन ऑफर कर सकता है ताकि वे ग्राहकों को उसका ही उत्पाद बेच पायें। इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफोर्म के माध्यम से भी उद्यमी अपने उत्पाद बेच सकता है। 

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