डे केयर बिजनेस कैसे शुरू करें? How to Start a Day Care Business.

Day care Business के बारे में बात शुरू करने से पहले यह जान लेना अति आवश्यक है की इस व्यापार की उत्पति मनुष्य की वर्तमान जीवनशैली के मद्देनजर ही हुई है। जहाँ पहले घर से बाहर के कार्यों को करने की स्वतंत्रता एवं जिम्मेदारी घर के पुरुषों की होती थी और घर की नारियों को घर के अन्दर के कार्यों को ही पूरी जिम्मेदारी एवं तत्परता के साथ निभाना पड़ता था। लेकिन यह तब तक था जब तक भारत में संयुक्त परिवारों की भरमार थी और लोग अपनी पूरी आजीविका कृषि एवं कृषि से सम्बंधित कार्यों से कमाते थे। उस समय पैसे का इतना महत्व एवं आवश्यकता इसलिए नहीं थी क्योंकि उस समय वस्तु विनिमय का बोलबाला था इसलिए लोग हर कोई कार्य पारस्परिक सहयोग के माध्यम से ही करते थे। लेकिन संयुक्त परिवारों के विघटन एवं औद्योगिकीकरण ने मानव जीवन में बहुत सारे प्रभावी बदलाव किये हैं। संयुक्त परिवारों के विघटन के कारण एकाकी परिवारों की संख्या में तीव्र वृद्धि हुई है। और आज भारत के महानगरों में एक नहीं बल्कि सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जिनमें पति एवं पत्नी दोनों नौकरी करते हैं। ऐसे में इनके पास अपने छोटे बच्चों को सँभालने का समय नहीं होता है यही कारण है की वे अपने बच्चों को Day Care में रखना पसंद करते हैं। ताकि वे अपनी अपनी व्यवसायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन आसानी से कर सकें। यही कारण है की आज के समय क्रीच फैसिलिटी, बेबी सिटींग या डे केयर नामक यह व्यापार भी अनेकों उद्यमियों की कमाई का एक बेहतरीन साधन बना हुआ है ।

Day Care Business plan in hindi

डे केयर क्या है? (What is Day care Business in Hindi)

Day Care का यदि हम शाब्दिक अर्थ समझने की कोशिश करेंगे इसका हिंदी में अर्थ दिन में देखभाल से लगाया जा सकता है। जैसा की हमने अभी उपर्युक्त वाक्य में भी बताया है की आज के परिदृश्य में संयुक्त परिवारों का लगभग पूरी तरह से विघटन हो गया है। और यदि आज संयुक्त परिवार दिखाई भी देंगे तो कुछ ही ऐसे परिवार ही दिखाई देंगे जो पूर्ण रूप से कृषि एवं कृषि से सम्बंधित कार्यों से अपनी आजीविका चलाते होंगे। संयुक्त परिवारों के विघटन एवं औद्योगिकीकरण के विस्तारीकरण, अपनी शर्तों पर जीवन जीने की महत्वकांक्षा, विलासिता पूर्ण वस्तुओं की बढती संख्या एवं मानव की उसको पाने की ललक के कारण मनुष्य अपने जीवन में अधिक से अधिक पैसा कमाने की ओर प्रयासरत रहता है। यही कारण है की वर्तमान में भारत के नगरों, महानगरों में भी बहुत सारे एकाकी परिवार ऐसे हैं जिनमें पति, पत्नी दोनों को अपनी नौकरी पर जाना पड़ता है। ऐसे में उनके घरों में रह रहे बच्चों एवं बुजुर्गों की देखभाल करने वाला दिन में कोई नहीं रहता है। ऐसे लोग उस एरिया विशेष में उपलब्ध Day Care का सहारा लेकर अपने घर में उपस्थित बच्चों एवं बुजुर्गों को वहां छोड़ जाते हैं। और ड्यूटी से आने के बाद अपने घर ले जाते हैं। चूँकि डे केयर व्यापार करने वाले उद्यमी द्वारा बच्चों एवं बुजुर्गों के परिवार से मासिक या दैनिक आधार पर फीस वसूली जाती है। जिससे उनकी कमाई होती है। साधारण शब्दों में ऐसे बच्चों एवं बुजुर्गों (जो खुद पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं हैं) की देखभाल उनके परिवार वालों के कहने पर करना ही Day Care Business कहलाता है।

डे केयर सम्बन्धी नियम एवं टिप्स :

जब भी कोई व्यक्ति भारत में Day Care Business शुरू करने की सोचता है तो जो सबसे पहला प्रश्न उसके दिमाग में कौंधता है। वह यही होता है की इस तरह का बिजनेस शुरू करने सम्बन्धी नियम एवं अधिनियम क्या होंगे। इसलिए आगे इस लेख में हम इसी विषय पर बात करेंगे। यद्यपि हाल ही के कुछ वर्षों में भारत सरकार ने नौकरीपेशा महिलाओं की समस्या को देखते हुए मैटरनिटी लीव बारह हफ़्तों से बढाकर छब्बीस हफ्ते कर दी थी। लेकिन इसके बाद नौकरीपेशा महिला को अपनी नौकरी बरक़रार रखने के लिए अपनी ड्यूटी पर पहुंचना ही होता है। कुछ महत्वपूर्ण नियम एवं टिप्स की लिस्ट निम्नवत है।

  • डे केयर सर्विस यानिकी क्रीच फैसिलिटी सिर्फ 90 दिन से लेकर दस वर्ष तक के बच्चों को दी जा सकती है।
  • इस तरह की बिजनेस की स्थापना के लिए उद्यमी को कम से कम उपर्युक्त बताये गए एज ग्रुप के पांच बच्चों की आवश्यकता होती है।
  • जहाँ तक डे केयर बिजनेस के लिए जगह का सवाल है यहाँ पर हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं की प्रति बच्चा कम से कम 6-8 वर्ग फूट जगह की आवश्यकता हो सकती है। ताकि उनके पास खेलने, आराम करने एवं अध्यन करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो।
  • चमकदार, हवादार एवं प्रकाशयुक्त कमरे होने चाहिए क्योंकि ये सभी चीजें बढ़ते बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
  • एक अच्छे Day Care Center में सैनिटेशन, साफ सफाई, स्वच्छता इत्यादि की बेहतर सुविधा होना अनिवार्य है।
  • खेलने का एरिया सेण्टर के बाहर होना चाहिए और जितनी जगह खेलने के लिए पर्याप्त होती है उससे अधिक ही होनी चाहिए।
  • रसोईघर को जहाँ बच्चों को रखा जाता है उससे काफी दूर रखना चाहिए ताकि कोई भी बच्चा रसोई में घुसकर किसी घटना का शिकार न हो सके।
  • बच्चों को बिस्तर पर लिटाने की व्यवस्था सबके लिए अलग अलग होनी चाहिए, ऐसा ही बुजुर्गों के लिए भी होना चाहिए और बिस्तर एवं लिनन को नियमित साफ़ करने की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
  • उद्यमी को बच्चों की आवश्यकतानुसार शैक्षणिक एवं खेल सामग्री उपलब्ध करायी जानी चाहिए।
  • एक डे केयर सेण्टर में कुछ सामान्य बीमारियों की दवाओं के साथ साथ प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। यहाँ पट्टियाँ कीटनाशक एवं मलहम अच्छी मात्रा में स्टॉक में होना चाहिए।
  • उद्यमी को चाहिए की वह बच्चों की देखभाल के लिए किसी ऐसे प्रोफेशनल की तलाश करे जिसने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से क्रीच प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया हो।
  • Day Care का संचालन करने के लिए उसके द्वार पर एक चौकीदार का होना भी नितांत आवश्यक है।
  • प्रत्येक तीन महीने में बच्चों की मेडिकल जाँच होना भी जरुरी होता है और इस जाँच का रिकॉर्ड रखना भी अति आवश्यक होता है।
  • मांग एवं इस्तेमाल के आधार पर कुछ वर्षों बाद उद्यमी द्वारा अपने डे केयर सेण्टर को अपग्रेड भी किया जा सकता है ।
  • यहाँ पर इस्तेमाल में लायी जाने वाली सभी सामग्री जैसे बर्तन, क्रॉकरी, खिलौने, गद्दे, तकिए, वॉकर इत्यादि जैसे आइटम जिन्हें इस्तेमाल में लाने के बाद फटने का खतरा रहता है। इन्हें प्रत्येक तीन वर्षों की अवधि में रिप्लेस किया जाना चाहिए। यद्यपि मशीनरी उपकरण जैसे रेफ्रीजिरेटर, टेलीविजन, वाशिंग मशीन इत्यादि को सात सालों बाद रिप्लेस किया जा सकता है।

डे केयर सेण्टर कैसे शुरू करें (How to Start a Day Care Center in India)

Day Care Center  खोलने के इच्छुक पुरुष या महिला को बच्चों से विशेष लगाव होना चाहिए और उसे बच्चों के साथ समय व्यतीत करने में मजा आना चाहिए। यह सब इसलिए जरुरी है ताकि उद्यमी को यह काम करने में कभी भी बोरियत या उदासी का एहसास नहीं हो और हमेशा उत्साह उसके मन में इस बिजनेस के प्रति बना रहे। रूचि के अलावा उद्यमी के पास इस क्षेत्र से सम्बंधित कोई प्रमाण पत्र भी होना चाहिए जो उसको क्रीच सेण्टर का लाइसेंस लेने में मदद करेगा।

1. अच्छी लोकेशन का चुनाव

ध्यान रहे जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की Day Care Business करने वाले उद्यमी के मुख्य ग्राहक के तौर पर ऐसे परिवार होंगे जिनमें पति पत्नी दोनों नौकरीपेशा होंगे। और उनके परिवार में बच्चों एवं बुजुर्गों यानिकी अक्षम लोगों की देखभाल के लिए कोई नहीं होगा। इसलिए यह बिजनेस शुरू करने से पहले सर्वप्रथम तो उद्यमी को वहां पर जहाँ वह यह बिजनेस शुरू करने की सोच रहा है । वहां पर पीपल ऑफ़ मेजोरिटी इस प्रकार की है या नहीं का विश्लेषण करना होगा, दूसरी जो सबसे अहम् बात है यह डे केयर सेण्टर रेजिडेंशियल सोसाइटी से अधिक दूरी पर नहीं होना चाहिए क्योंकि ग्राहकों को अपने बच्चों एवं बुजुर्गों को सेण्टर में छोड़कर ड्यूटी पर भी जाना होता है। इसलिए वे चाहते हैं की यह क्रीच सेण्टर उनके घर के आस पास ही हो ताकि उन्हें बच्चों को छोड़ने ले जाने इत्यादि में अधिक समय खर्च न करना पड़े। इसके अलावा सेण्टर तक पहुँचने का रास्ता ठीक होना चाहिए और सड़क से ही इस पर लोगों की नज़र पहुँच जानी चाहिए। इस बिजनेस को सफल बनाने में लोकेशन का बड़ा अहम् योगदान है।   

2. पर्याप्त जगह एवं इंफ्रास्ट्रक्चर का होना

चूँकि Day Care center में लगभग 8-12 घंटे बच्चों को रहना होता है इसलिए इस लम्बी अवधि में उन्हें खान पान से लेकर निद्रा, खेल इत्यादि सभी की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए उद्यमी को उनके लिए इन सभी सुविधाओं का प्रबंध करना होता है और वह भी व्यक्तिगत रूप से सबके लिए अलग अलग। ऐसे में उद्यमी को एक बड़ी जगह एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है हालांकि यदि किसी का स्वयं का घर या बंगला खाली पड़ा हो तो वह अपनी कमाई करने के लिए इस तरह का बिजनेस शुरू कर सकता है। लेकिन यदि उद्यमी के पास जमीन नहीं हो तो उसे कोई बिल्डिंग या जगह खरीदने या किराये पर लेने की आवश्यकता हो सकती है।     

3. लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन:

हालांकि हम नेशनल रिसोर्स सेण्टर फॉर हेल्थ एंड सेफ्टी इन चिल्ड्रेन केयर एंड अर्ली एजुकेशन के हवाले से कुछ नियमों का उल्लेख उपर्युक्त वाक्यों में कर चुके हैं। यानिकी Day Care center लाइसेंस के लिए उद्यमी तभी आवेदन कर सकता है जब वह एक निश्चित संख्या से अधिक बच्चों की देखभाल कर रहा हो। इसके अलावा आवेदनकर्ता के पास बच्चों की देखभाल करने के सम्बन्ध में लिए गए प्रशिक्षण या क्लास को पूरा करने का प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। यद्यपि यह प्रमाण पत्र फाइनल इंस्पेक्शन के समय चाहिए होता है। उद्यमी को कंपनी नियमों के मुताबिक मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स में प्रोप्राइटरशिप, पार्टनरशिप, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इत्यादि में से किसी एक के तहत अपने बिजनेस को रजिस्टर कराने की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा उद्यमी को लाइसेंसिंग एजेंसी के साथ इंस्पेक्शन का शेड्यूल निर्धारित करना होगा इंस्पेक्शन के बाद ही सम्बंधित विभाग लाइसेंस प्रदान करने या न करने का निर्णय लेगा।      

4. मार्केटिंग (Promote your Day Care Business)

चूँकि इसमें उद्यमी के Day Care Center में अपने बच्चों को सिर्फ वही लोग भेजने की कोशिश करेंगे जो उसके नज़दीक हों। कहने का आशय यह है की उद्यमी का टारगेट क्षेत्र सिमित है इसलिए वह चाहे तो खुद एक एक ऐसे परिवार से जिसके पति पत्नी दोनों नौकरी करते हों मिल सकता है। और उन्हें इस बात का विश्वास दिला सकता है की उसके द्वारा उनके बच्चे की अच्छी एवं सही देखभाल की जाएगी। इसके अलावा उद्यमी उस क्षेत्र में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले यानिकी लोकप्रिय अख़बार में अपना विज्ञापन छापकर भी लोगों को अपना Day Care Business से अवगत करा सकता है। इसके अलावा उद्यमी को अपने मौजूदा ग्राहकों से अपने द्वारा दी जाने वाली सर्विस के बारे में फीडबैक लेते रहना चाहिए ताकि वह उसी के अनुरूप अपने बिजनेस में सुधार कर पाने में सक्षम हो सके।    

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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