रिटेलिंग परिभाषा प्रकार एवं फायदे. Definition Types Benefits of Retail Business.

Retail Business व्यापार की वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं तक उत्पादों को पहुँचाया जाता है। लेकिन रिटेल को समझने के लिए सिर्फ इतना ही कहना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि अक्सर हम अपने जीवन में रिटेल एवं थोक शब्द बार बार सुनते हैं और सोचने पर मजबूर हो जाते हैं की आखिर इन शब्दों का मतलब क्या होगा। यही कारण है की आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से न सिर्फ रिटेल शब्द को समझने की कोशिश करेंगे। बल्कि रिटेलर, रिटेलिंग जैसे शब्दों को भी समझने एवं समझाने का भरसक प्रयत्न करेंगे । चूँकि किसी भी उत्पाद को बेचने के लिए बाजार में प्रमुख रूप से दो तरह के विक्रेता थोक एवं रिटेल मौजूद होते हैं। इसलिए इनके बारे में उचित जानकारी रखना हर किसी व्यक्ति के लिए बेहतर हो सकता है। तो आइये जानने की कोशिश करते हैं की आखिर रिटेल की सही एवं सटीक परिभाषा क्या हो सकती है।

Definition Types benefits of Retail Business in Hindi

रिटेल किसे कहते हैं (What is Retail Business) 

रिटेल चूँकि एक अंग्रेजी शब्द है इसलिए इसका हिंदी में शाब्दिक अर्थ खुदरा होता है। जब कोई उपभोक्ता स्वयं के उपभोग के लिए कोई वस्तु या उत्पाद खरीदना चाहता है तो उसका रुख रिटेल स्टोर की तरफ ही होता है। वैसे देखा जाय तो एक रिटेल स्टोर किसी भी उत्पाद की छोटी छोटी मात्रा का प्रबंधन करता है यानिकी वह किसी भी उत्पाद को बेहद कम मात्रा में ही खरीदता है। जबकि एक थोक विक्रेता द्वारा माल को बड़ी मात्रा में खरीदकर बेचा जाता है। यही कारण है की जहाँ थोक विक्रेता से अधिकतर वही लोग माल खरीदते हैं जिन्हें अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है। अर्थात थोक विक्रेता अधिकतर रिटेल स्टोरों को ही माल की सप्लाई करते हैं। जबकि रिटेल स्टोर अपना अधिकतर माल अंतिम उपभोक्ता को बेचते हैं। इसलिए एक ऐसा काम जो किसी उद्यमी द्वारा अंतिम उपभोक्ता को बिक्री करने की दृष्टी से किया जाता है उसे Retail Business कह सकते हैं। साधारण शब्दों में गली मोहल्लों में स्थित दुकान जहाँ से आप फूटकर में वस्तुएं एवं सामान खरीद सकते हैं उन्हें रिटेल स्टोर कहा जाता है।

रिटेलर कौन है  (Who are Retailers)

एक रिटेलर एक ऐसा व्यक्ति या बिजनेस इकाई हो सकती है जहाँ से लोग अपना उपभोग करने के लिए सामान खरीदते हैं। ध्यान रहे की जो रिटेलर होते हैं वे स्वयं किसी भी उत्पाद का विनिर्माण नहीं करते हैंबल्कि वे किसी विनिर्माणकर्ता, डिस्ट्रीब्यूटर, थोक विक्रेता से सामान खरीदते हैं और उसे अंतिम उपभोक्ता को बेचते हैं।

रिटेलिंग क्या है  (What is Retailing)

रिटेलिंग की बात करें तो इसे एक वितरण प्रक्रिया भी कहा जा सकता है जी हाँ सामान या सेवाओं को प्रदान करने एवं उन्हें इस्तेमाल के लिए ग्राहकों को बिक्री करने के लिए अपनाई जाने वाली वितरण प्रक्रिया को ही रिटेलिंग कहते हैं।

रिटेलिंग के प्रकार  (Types of Retail Business)

रिटेलिंग विभिन्न प्रकार की हो सकती है लेकिन कुछ प्रमुख प्रकारों का संक्षिप्त विवरण निम्नवत है।

1. स्टोर रिटेलिंग  (Store Retailing)

डिपार्टमेंटल स्टोर ग्राहकों को आकर्षित करने का रिटेलिंग का सबसे अच्छा स्वरूप है। वैसे देखा जाय तो स्टोर रिटेलिंग में एक नहीं अपितु अनेकों जैसे स्पेशलिटी स्टोर, सुपर मार्किट, सुविधा स्टोर, ड्रग स्टोर, सुपर स्टोर इत्यादि शामिल हैं। इस तरह के स्टोरों द्वारा विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक कीमत रणनीति भी अपनाई जाती है । ताकि वे अपने स्टोर को सफलतापूर्वक चलाने में विफल न हों।

2. नॉन स्टोर रिटेलिंग  (Non Store Retailing)

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है की जब माल या सामान किसी स्टोर या दुकान के माध्यम से न बेचकर वैसे ही बेचा जाता है। तो इसे नॉन स्टोर रिटेलिंग कहा जा सकता है। इसलिए यह भी अनेकों प्रकार की होती है जिन्हें निम्न रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

डायरेक्ट मार्केटिंग

डायरेक्ट मार्केटिंग नॉन स्टोर रिटेलिंग का ही एक स्वरूप है इसमें माल या सामान किसी दुकान के माध्यम से नहीं बेचा जाता है। बल्कि इस प्रक्रिया में माल या सामान को कंपनी द्वारा नियुक्त कर्मचारी उपभोक्ताओं के दरवाजे तक माल या सामान को डिलीवर करते हैं। इस प्रक्रिया में डायरेक्ट मेल मार्केटिंग, कैटलॉग मार्केटिंग, टेलीमार्केटिंग, ऑनलाइन शॉपिंग इत्यादि शामिल हैं।

डायरेक्ट बिक्री

डायरेक्ट सेलिंग को बहुस्तरीय बिक्री या फिर नेटवर्क बिक्री के रूप में भी जाना जा सकता है। इस प्रक्रिया में भी दरवाजे दरवाजे जाकर उत्पाद या सामान बेचना शामिल है। इस प्रक्रिया में कंपनी द्वारा या कंपनी के किसी एजेंट द्वारा किसी विशेष एरिया में एक होस्ट नियुक्त किया जाता है। और वह होस्ट उस एरिया में उपस्थित लोगों को किसी एक स्थान पर आमंत्रित करता है उसके बाद कंपनी का सेल्स पर्सन वहां पर जाकर उत्पादों को प्रदर्शित करता है और आर्डर लेता है।   

आटोमेटिक वेंडिंग

अपने सामान एवं उत्पाद की बिक्री के लिए अपने ग्राहकों को आटोमेटिक वेंडिंग मशीन प्रदान करना भी नॉन स्टोर रिटेलिंग में शामिल है। यद्यपि कम्पनियों द्वारा इन्हें ऑफिस, फैक्ट्री, गैसोलीन स्टेशन, बड़े स्टोर को ही प्रदान किया जाता है क्योंकि इनकी उपभोग क्षमता व्यक्तिगत व्यक्ति से कहीं अधिक होती है। ये अपने कर्मचारियों या ग्राहकों को विभिन्न उत्पाद जैसे चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक इत्यादि ऑफर कर रहे होते हैं।

बिक्री सेवाएँ

इस नॉन स्टोर रिटेलिंग के अंतर्गत वे गतिविधियाँ शामिल हैं जब कोई उद्यमी केवल और केवल कुछ बिजनेस इकाइयों के साथ अनुबंध तैयार करके उन्हें उत्पाद या सेवाएं बेच रहा होता है। कहने का आशय यह है की बिक्री सेवाओं से हमारा अभिप्राय उन रिटेलिंग गतिविधियों से है। जिसमें उद्यमी अपने ग्राहक को अनुबंध के मुताबिक डिस्काउंट इत्यादि देने के लिए प्रतिबंधित रहता है। इसमें जैसे किसी ऑफिस में हाउसकीपिंग मटेरियल, स्टेशनरी इत्यादि प्रदान करने वाली इकाइयाँ शामिल हैं।

3. कॉर्पोरेट रिटेलिंग (Corporate Retailing)

कॉर्पोरेट रिटेलिंग से हमारा आशय उस प्रक्रिया से है जब कोई कंपनी या व्यक्ति एक नहीं बल्कि अनेकों रिटेल स्टोर श्रंखलाबद्ध तरीके से संचालित किये जाते हैं। यद्यपि इंडिपेंडेंट रिटेलर की तुलना में कॉर्पोरेट रिटेलर की संख्या थोड़ी होती है लेकिन उपभोक्ता बाजार का एक बहुत बड़ा हिस्सा कमाने में ये सक्षम होते हैं। कॉर्पोरेट रिटेलिंग आम तौर पर कम्पनी या किसी बिजनेस इकाई द्वारा फंडेड एवं संचालित होती हैं। कहने का आशय यह है की इसमें कॉर्पोरेट चेन स्टोर, फ्रैंचाइज़ी, रिटेलर और कंज्यूमर को ऑपरेटिव मर्चेंडाइजिंग कॉग्लोमेरेट्स इत्यादि संगठन शामिल हैं।

रिटेलिंग के फायदे (Benefits of Retail Business)

यद्यपि रिटेलिंग के प्रकार के आधार पर Retail Business के अलग अलग फायदे हो सकते हैं लेकिन यहाँ पर हम कुछ सामान्य एवं प्रमुख फायदों की लिस्ट दे रहे हैं।

  • रिटेल बिजनेस को किसी भी इच्छुक उद्यमी द्वारा थोक बिजनेस की तुलना में बेहद कम खर्चा करके अर्थात बेहद कम निवेश के साथ आसानी से शुरू किया जा सकता है ।
  • Retail Business का अगला फायदा यह है की इसमें उद्यमी थोक दामों में सामान खरीदकर उन्हें रिटेल कीमतों में बेचकर आसानी से कमाई कर सकता है।
  • चूँकि रिटेल विक्रेताओं द्वारा उत्पाद अंतिम उपभोक्ता को बेचे जाते हैं इसलिए छोटे स्तर पर यह व्यापार शुरू करने पर भी थोक विक्रेता की तुलना में प्रति वस्तु/उत्पाद रिटेलर अधिक कमाते हैं ।
  • रिटेल बिजनेस में चूँकि उद्यमी के स्टोर या दुकान में स्थानीय लोग ही अक्सर आते हैं इसलिए ऐसे में कई व्यक्ति नियमित तौर पर उद्यमी की दुकान में सामान लेने आते हैं । जिससे उद्यमी एवं ग्राहक के बीच जान पहचान सी हो जाती है और उद्यमी को इस बात की संतुष्टि रहती है की उसके स्थायी ग्राहक भी बनते जा रहे हैं।
  • Retail Business शुरू करने का अगला फायदा यह है की इस तरह के व्यापार को उद्यमी अपने कार्य करने की क्षमता के अनुसार एडजस्ट कर सकता है। और वह आसानी से अकेले भी अपने इस व्यापार को संभाल सकता है। यानिकी उसे हर वक्त मैनपावर की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि यदि उसे लगता है की काम बढ़ गया है तो फिर वह उसी के अनुसार मैनपावर भी बढ़ा सकता है।
  • इस तरह के व्यापार का अगला फायदा यह है की इसे बेहद कम निवेश के साथ तो शुरू किया ही जा सकता है। लेकिन इसके अलावा उद्यमी इसे बेहद कम प्रयासों के साथ भी शुरू कर सकता है। बशर्ते उद्यमी को एक नजर अपने पास उपलब्ध संसाधनों पर डालनी होती है।

यह भी पढ़ें

About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *