नौकरी एवं बिजनेस में 15 बड़े अंतर. Difference Between Job and Business.

मनुष्य जीवन संघर्षों से परिपूर्ण है इसमें कोई दो राय नहीं है कहने का आशय यह है की मनुष्य पर अपनी उम्र के अलग अलग पड़ावों में अलग अलग दायित्वों को पूरा करने की जिम्मेदारी उसके कन्धों पर आती है। केवल बचपन यानिकी 1 वर्ष से 5 साल तक की उम्र का समय ही एक ऐसा होता है जिससे किसी की कोई अपेक्षा नहीं जुड़ी होती है। उसके बाद ज्यों ज्यों बच्चा शिक्षा ग्रहण करने स्कूल जाता है माँ बाप को अपेक्षा रहती है की उनकी संतान पढ़ाई में अव्वल आये। और फिर उसके बाद यह सिलिसिला चलता रहता है। यही कारण है की जब व्यक्ति की शिक्षा पूर्ण हो जाती है या व्यक्ति आगे की शिक्षा के खर्चे को उठा नहीं पाता और कमाई करने का विचार अपने मष्तिष्क में लाता है। क्योंकि सामाजिक पारिवारिक दायित्वों को निष्पादित करने के लिए मनुष्य को धन की आवश्यकता होती है। और धन कुछ काम धंधा या नौकरी करके ही कमाया जा सकता है। ऐसे में जब व्यक्ति की पढाई पूर्ण हो जाती है तो वह विचार करता है की उसके लिए जॉब या बिजनेस में से क्या करना अच्छा रहेगा। या कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस प्रश्न को थोड़ा घुमा फिराकर पूछते हैं जैसे की नौकरी एवं बिजनेस में क्या अंतर होता है। इन दोनों प्रश्नों में मनुष्य यही जानना चाहता है की इन दोनों में से क्या बेहतर हो सकता है। हालांकि किस व्यक्ति के लिए क्या उपयुक्त रहेगा यह विभिन्न कारकों जैसे व्यक्ति की शिक्षा, रूचि, जीवन के लक्ष्य, अनुभव, कौशल, पारिवारिक स्थिति, व्यक्तिगत हालात इत्यादि पर निर्भर करता है। इसलिए अलग अलग व्यक्तियों के लिए अलग अलग कमाई के विकल्प जैसे किसी के लिए नौकरी तो किसी के लिए जॉब करना बेहतर होता है। लेकिन आम तौर पर लोगों में यह भ्रान्ति है की जॉब के मुकाबले बिजनेस ही बेहतर होता है जबकि यह सत्य नहीं है । किसी के लिए जॉब तो किसी के लिए व्यापार करना विभिन्न कारकों के आधार पर उपयुक्त हो सकता है। इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से नौकरी एवं बिजनेस में अंतर समझने का प्रयत्न करेंगे । ताकि इन अंतरों को जानकार लोग खुद निर्णय लेने में सक्षम हो सकें की उनके लिए रोजगार का कौन सा स्रोत बेहतर साबित होगा।

job vs business in hindi

नौकरी एवं व्यापार में अंतर (Difference Between Job and Business in Hindi):

जिस प्रकार पानी में उतरने से पहले पानी की गहराई को जानना आवश्यक है क्योंकि यदि पानी बहुत गहरा हुआ और पानी में उतरने वाले व्यक्ति को तैरना नहीं आया तो उसकी मृत्यु तक हो सकती है। इसलिए जीवन में भी कैरियर का चुनाव करते वक्त मनुष्य को अपनी योग्यता, संसाधनों, पारिवारिक स्थिति इत्यादि का ध्यान रखकर ही जॉब या बिजनेस में से किसी एक का चयन करना होता है। इसके अलावा जब उद्यमी को नौकरी और बिजनेस में क्या अंतर होता है की जानकारी हो पायेगी तभी वह इस बात का निर्णय ले पाने में सफल हो पायेगा की उसके लिए भविष्य में कौन सा विकल्प उचित हो सकता है।

  1. व्यापार में उद्यमी खुद का बॉस खुद होता है, जबकि जॉब के दौरान व्यक्ति को किसी न किसी बॉस के अधीन काम करना पड़ता है।
  2. जो व्यक्ति खुद का व्यापार कर रहा होता है वह खुद के निर्णय लेने एवं उन्हें लागू करने के लिए स्वतंत्र होता है। जबकि जॉब कर रहे व्यक्ति को निर्णय लेने एवं उन्हें लागू करने के लिए बॉस की स्वीकृति की आवश्यकता होती है।
  3. जो व्यक्ति खुद का बिजनेस कर रहा होता है यदि उससे काम के दौरान कुछ गलती भी हो जाय तो उसे डांटने वाला कोई नहीं होता। जबकि जॉब कर रहे व्यक्ति से गलती हो जाने पर उसे डांट का सामना करना पड़ता है।  
  4. जो व्यक्ति खुद का बिजनेस कर रहा होता है वह अपने व्यापार एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप ऑफिस जाने का समय खुद ही तय कर सकता है । जबकि जॉब कर रहे व्यक्ति को एक निर्धारित समय पर अपने कार्यालय जाना होता है ।
  5. नौकरी और बिजनेस में अगला अंतर प्रॉफिट या लाभ से जुड़ा हुआ है बिजनेस कर रहा व्यक्ति पूरे लाभ का भागीदार होता है तो वहीँ नौकरी कर रहे व्यक्ति को महीने में एक निश्चित मात्रा में वेतन की प्राप्ति होती है।
  6. बिजनेस कर रहे उद्यमी को कोई उसके काम से बहिष्कृत नहीं कर सकता अर्थात उसे उसके काम से निकाल नहीं सकता। जबकि जॉब कर रहे व्यक्ति को कंपनी या नियोक्ता उसकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने पर निकाला जा सकता है।
  7. बिजनेस को कोई भी व्यक्ति यहाँ तक की एक अशिक्षित व्यक्ति भी शुरू कर सकता है इसके लिए अधिकृत तौर पर किसी भी क्वालिफिकेशन की आवश्यकता नहीं होती। जबकि अलग अलग जॉब के लिए अलग अलग क्वालिफिकेशन निर्धारित होती है।
  8. चूँकि उद्यमी लगभग सभी प्रकार के प्रोफाइल का प्रबंधन कर रहा होता है इसलिए उसके पास सीखने के अवसर अधिक होते हैं। जबकि नौकरी कर रहे व्यक्ति को अपनी ही प्रोफाइल के तहत कार्य करने की आज़ादी होती है।
  9. बिजनेस में व्यक्ति जो भी, जैसा भी और जितना भी कर रहा होता है उसे उसका संतोष होता है जबकि जॉब में व्यक्ति को कितना भी मिल जाय फिर भी उसे लगता है। की उसे उसकी मेहनत एवं प्रयासों के अनुरूप नहीं मिल रहा है।
  10. अपना व्यापार करने वाले व्यक्ति उस कंपनी में किसी और के बनाये नियमों को पालन करने के लिए मजबूर नहीं होते बल्कि वे अपने नियम खुद निर्धारित करते हैं। जबकि जॉब में व्यक्ति को कंपनी एवं नियोक्ता द्वारा बनाये गए नियमों का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता होती है।
  11. अपना बिजनेस करके उद्यमी औरों को भी रोजगार दे रहा होता है जबकि नौकरी करने वाले व्यक्ति अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे होते हैं।
  12. ऐसे बेहद कम बिजनेस होते हैं जिन्हें बेहद कम निवेश के साथ शुरू किया जा सके अधिकतर बिजनेस शुरू करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होती है। जबकि जॉब यदि उद्यमी में काबिलियत है तो वह मुफ्त में ही इंटरव्यू के माध्यम से पा सकता है।
  13. बिजनेस करने वाले व्यक्ति को कई कार्यों का प्रबंधन देखने की आवश्यकता होती है इसलिए उसमें विभिन्न कार्यों के प्रबंधन का तनाव सहने की क्षमता होनी चाहिए। जबकि जॉब में व्यक्ति सिर्फ अपनी प्रोफाइल के लिए जिम्मेदार होता है।
  14. व्यापार कर रहे व्यक्ति को नियमित आय का आश्वासन नहीं होता जबकि जॉब कर रहे व्यक्ति को नियमित आय मिलना सुनिश्चित है।
  15. बिजनेस में एक कहावत काफी प्रचलित है की जितना बड़ा रिस्क उतना बड़ा प्रॉफिट इसलिए बिजनेस में जोखिम काफी है जबकि नौकरी या जॉब जोखिमों से मुक्त है।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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