E way bill क्या है? इसकी वैधता फायदे एवं इसे कैसे बनायें? पूरी जानकारी .

E way bill पर बात करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि इसे जीएसटी काउंसिल द्वारा 1 अप्रेल 2018 से पूरे देश भर में लागू करने की स्वीकृति मिल चूकी है | यद्यपि शुरुआत में इसे सिर्फ (Inter-State) यानिकी एक राज्य से दूसरे राज्य को ले जाने वाले माल पर ही लागू किया गया था | लेकिन बाद में इसे सिलसिलेवार तरीके से (Intra- State) यानिकी एक ही राज्य के अंतर्गत परिवहन किये जाने वाले माल पर भी लागू कर दिया गया है | एक ही राज्य के अंतर्गत माल की आवाजाही पर E way bill को सबसे  पहले कर्नाटक राज्य में 1 अप्रैल 2018 से लागू कर दिया गया | उसके बाद 15 अप्रैल 2018 से इसे आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी लागू कर दिया गया | 20, अप्रैल 2018 से बिहार, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश, झारखण्ड, त्रिपुरा एवं उत्तराखंड में भी इसे लागू कर दिया गया | 25, अप्रैल 2018 से E way bill system को अरुणांचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मेघालय, पुडूचेरी, सिक्किम एवं 1 मई 2018 से नागालैंड के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया है | आगे जो राज्य शेष रह गए हैं उनमें भी इस सिस्टम को सिलसिलेवार तरीके से लागू करने का सिलसिला जारी है | चूँकि यह प्रणाली कारोबार से जुड़ी हुई है इसलिए कारोबारियों, उद्यमियों के मन में E way Bill System सम्बन्धी सवाल उठना लाजिमी है | अधिकतर कारोबारी इसके बारे में यही जानना चाहते होंगे की यह E way Bill है क्या? और वर्तमान कर प्रणाली अर्थात जीएसटी प्रणाली में यह किस तरह से काम करेगा ? यह कब चाहिए होता है ? इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? और उद्यमियों एवं सरकार के लिए इसकी उपयोगिता क्या है? आज इस लेख के माध्यम से हम इन्हीं सब सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं |

e way bill GST regime

ई वे बिल क्या है (What is an e way bill in Hindi):

E way bill को हम एक कंप्यूटर जनरेटेड दस्तावेज कह सकते हैं अर्थात यह एक इलेक्ट्रॉनिक बिल होता है | जिसे उस व्यक्ति को अपने साथ ले जाने की आवश्यकता होती है जो माल (Goods) के किसी कन्साइनमेंट जिसकी टैक्स मिलाकर कीमत 50000 या इससे अधिक है को ईधर उधर ले जा रहा हो | इस बिल को जीएसटी के कॉमन पोर्टल से कोई भी पंजीकृत व्यक्ति या ट्रांसपोर्टर जनरेट कर सकता है | वैकल्पिक तौर पर E way bill SMS एवं एप्प के माध्यम से भी जनरेट एवं कैंसिल किया जा सकता है | जब किसी पंजीकृत व्यक्ति या ट्रांसपोर्टर द्वारा इसे जनरेट किया जाता है तो एक unique eway bill number (EBN) आवंटित किया जाता है | जो माल भेजने वाले, माल रिसीव करने वाले और ट्रांसपोर्टर के पास उपलब्ध रहता है | देश में जीएसटी सिस्टम लागू होने से पहले भी Sales Tax एवं VAT Tax System में भी इस तरह की व्यवस्था का प्रावधान था | कहने का आशय यह है की जीएसटी से पहले इस तरह का बिल कागज़ पर बनता था जिसे रोड परमिट कहा जाता था | वर्तमान में E way bill कंप्यूटर जनरेटेड है |

कब होगी ई वे बिल की आवश्यकता (When  E way bill Needed):

E way bill की आवश्यकता उस स्थिति में होगी जब किसी सप्लायर द्वारा रूपये पचास हज़ार से अधिक कीमत वाले माल को ट्रांसपोर्ट किया जा रहा हो अर्थात उस माल को एक जगह से दूसरी जगह को भेजा जा रहा हो | जीएसटी कॉमन पोर्टल के माध्यम से इसे जीएसटी में पंजीकृत माल भेजने वाला या रिसीवर कोई भी जनरेट कर सकता है इसके अलावा ट्रांसपोर्टर भी अपने आपको इस पोर्टल पर रजिस्टर करा के उसके बाद E way Bill जनरेट कर सकता है | कहने का आशय यह है की जब भी किसी व्यक्ति द्वारा 50000 रूपये की कीमत से अधिक के माल को ट्रांसपोर्ट किया जा रहा हो चाहे वह माल किसी को सप्लाई हो रहा हो, रिटर्न हो रहा हो, या कोई अन्य कारण हो E way Bill जरुरी है |

ई वे बिल जारी करने के लिए कौन कौन अधिकृत है (Who is authorize to generate E way bill):

E way bill System के अंतर्गत इसे जारी करने के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को प्राधिकृत किया गया है |

पहली स्थिति: माल की ढुलाई यदि किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा जो जीएसटी में पंजीकृत हो अपने वाहन द्वारा की जा रही हो तो ऐसी स्थिति में भेजने वाला या पाने वाला E way bill generate करने के लिए अधिकृत होंगे | इसके लिए उन्हें फॉर्म GST EWB 01 भरने की आवश्यकता हो सकती है |

दूसरी स्थिति: जब किसी जीएसटी में पंजीकृत व्यक्ति द्वारा माल की ढुलाई का काम ट्रांसपोर्टर को दिया गया हो यानिकी जब पंजीकृत व्यक्ति अपना माल ट्रांसपोर्टर के माध्यम से सड़क के रस्ते रिसीवर तक पहुँचा रहा हो | लेकिन उसने E way bill Generate न किया हो तो इसे जनरेट करने की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर की होती है लेकिन इससे पहले पंजीकृत व्यक्ति द्वारा ट्रांसपोर्टर की जानकारी फॉर्म GST EWB के पार्ट बी में भरनी होती है |

तीसरी स्थिति: जब किसी अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा माल की दुलाई अपने वाहन या किसी ट्रांसपोर्टर की सर्विस लेकर भेजा जाता है तो इस स्थिति में ई वे बिल या तो अपंजीकृत व्यक्ति या फिर ट्रांसपोर्टर द्वारा जारी किया जाएगा |

चौथी स्थिति: जब  किसी अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा पंजीकृत व्यक्ति को माल भेजा जा रहा हो और पंजीकृत व्यक्ति माल भेजते वक्त अपंजीकृत व्यक्ति को भली भांति जानता हो | इस स्थिति में यह मान लिया जायेगा की माल को पंजीकृत व्यक्ति द्वारा भेजा जा रहा है | इसलिए पंजीकृत व्यक्ति या ट्रांसपोर्टर द्वारा E way bill जारी किया जा सकता है |

कहने का आशय यह है की 50000 से ऊपर की कीमत वाले माल को ट्रांसपोर्ट करने से पहले E way Bill जारी करना जरुरी है | इसलिए कारोबारी एवं ट्रांसपोर्टर इसे जारी करने के लिए अधिकृत हैं |

ई वे बिल की वैधता (Validity of E way bill in Hindi):

E way bill की वैधता इस बात पर निर्भर करती है की माल को कितनी दूर भेजा जाना है | दूरी के आधार पर इसकी वैधता का विवरण निम्नलिखित है |

  • यदि माल को 100 किलोमीटर की दूरी तक भेजना है तो इस स्थिति में ई वे बिल की वैधता केवल एक दिन होगी |
  • 100 से 300 किलोमीटर की दूरी पर माल भेजने के लिए E way Bill की वैधता तीन दिन निर्धारित की गई है |
  • यदि माल का ट्रांसपोर्ट 300 से 500 किलोमीटर के बीच होना होगा तो इस स्थिति में ई वे बिल दस दिनों के लिए वैध होगा |
  • 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए E way Bill की वैधता 15 दिन होगी |
  • ध्यान रहे माल को ई वे बिल की वैधता वाले समय में ही भेजना अति आवश्यक होगा यदि किसी कारणवश यह समय निकल जाता है और माल की डिलीवरी नहीं हो पाती तो इस स्थिति में दुबारा से E way Bill Generate करना होगा |

यह वैधता अंतिम दिन की आधी रात को समाप्त हो जायेगी ई वे बिल की वैधता की गणना को इस उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है |

उदाहरणार्थ: माना एक E way bill को  5 अप्रैल के 00:15 पर जनरेट किया जाता है तो इस स्थिति में यह 6-7 अप्रैल की मध्यरात्रि अर्थात 12:00 बजे समाप्त हो जायेगा, दूसरा दिन अप्रैल 7-8, तीसरा 8-9 की मध्यरात्रि अर्थात 12:00 बजे समाप्त होगा |

ई वे बिल की आवश्यकता कब नहीं होगी:

E way bill system में ऐसी परिस्थितियां भी निर्धारित की गई हैं जिनमे ई वे बिल की आवश्यकता नहीं होगी उनका संक्षेप में वर्णन कुछ इस प्रकार से है |

  • यदि ट्रांसपोर्ट किये जाने वाले माल की कीमत रूपये पचास हज़ार से कम हो |
  • यदि जिस वाहन में माल जा रहा हो वह एक गैर मोटर वाहन (non motor vehicle) हो |
  • बंदरगाहों, हवाई अड्डे, एयर कार्गो परिसर और भूमि सीमा शुल्क स्टेशन से अंतर्देशीय कंटेनर डिपो या सीमा शुल्क निकासी के लिए एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन से माल ले जाया जा रहा हो |
  • एक ही राज्य के अंतर्गत 10 किलोमीटर से कम के दायरे में माल ले जाने के लिए ई वे बिल की आवश्यकता नहीं होगी |

ई वे बिल कैसे बनायें (How to generate e way bill in Hindi):

E way bill को दो तरीकों ऑनलाइन एवं SMS के माध्यम से जनरेट किया जा सकता है लेकिन इन दोनों में से किसी भी विधि द्वारा ई वे बिल बनाने के लिए पहले से कुछ जरुरी चीजें चाहिये होती हैं जिनका वर्णन निम्नलिखित है |

  • सबसे पहले व्यक्ति को ई वे बिल के अधिकारिक पोर्टल पर अपने आपको रजिस्ट्रेशन करना होता है |
  • माल से समबन्धित दस्तावेज जैसे बिल, चालान इत्यादि अपने हाथ में तैयार रखने होते हैं |
  • यदि सड़क से माल जा रहा हहो तो ट्रांसपोर्टर आईडी या वाहन नंबर की आवश्यकता हो सकती है |
  • यदि रेल, विमान, जहाज द्वारा माल ट्रांसपोर्ट किया जा रहा हो तो ट्रांसपोर्टर आईडी, ट्रांसपोर्ट दस्तावेज संख्या और दस्तावेज में उल्लेखित डेट तैयार रखें |

अब यदि व्यक्ति ने अपने आपको अधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर कर लिया हो और उपर्युक्त दस्तावेज उसके पास तैयार हों तो E way bill Generate करने के लिए उसका अगला कदम इसी पोर्टल पर लॉग इन करने का होना चाहिये |  लॉग इन करने के बाद व्यक्ति को बायीं ओर e way bill दिखाई देगा उस पर cursor ले जाएँ वह Expand हो जायेगा और Generate New नामक विकल्प दिखाई देगा उस पर क्लीक करके आगे बढिए | उसके बाद e way bill Generate करने वाले व्यक्ति को Transaction, document, item, transportation  सम्बन्धी डिटेल भरनी होती है | सारी आवश्यक डिटेल भरकर Submit पर क्लीक करना होता है | उसके बाद 12 Digit का E way bill Generate हो जाता है | इसी पोर्टल के माध्यम से व्यक्ति इसका प्रिंट आउट निकाल सकता है और माल को ट्रांसपोर्ट करते समय अपने साथ ले जा सकता है |

 ई वे बिल के फायदे (Benefits of e way bill in Hindi):

माल की आवाजाही पर नज़र रखना सरकार के लिए हमेशा से एक चुनौती रही है | कर चोरी एवं राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए सरकार ने राजमार्गों पर अनेकों चेक पोस्ट बनाये हुए हैं | जहां पर माल ले जा रहे वाहनों का निरीक्षण किया जाता है | चूँकि E way bill को ऑनलाइन एवं SMS के माध्यम से भी जनरेट किया जा सकता है | इसलिए सरकार एवं कारोबारी दोनों को इसके फायदे हो सकते हैं जिनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • पुरानी पद्यति में कारोबारी या ट्रांसपोर्टर को अनेकों दस्तावेज जैसे चालान, रोड परमिट, बिल इत्यादि लेके चलाने पड़ते थे अब चूँकि या सब जानकारी E way bill Generate करते समय दी जाएगी | इसलिए ट्रांसपोर्ट के दौरान ई वे बिल की कॉपी रखना, और चालान, बिल में से किसी एक की कॉपी रखना भी काफी हो सकता है |
  • इस पद्यति में फर्जी कागज़ तैयार करने की प्रक्रिया पर लगाम लगेगी क्योंकि E way bill number को Radio Frequency Identification Device के साथ लिंक किया गया है | चेक पोस्ट पर इस तरह की डिवाइस इनस्टॉल किये जाने का प्रावधान है | इसलिए ई वे बिल नंबर को डिवाइस के पास ले जाकर उसकी सारी जानकारी स्वत: ही कंप्यूटर पर दिखने लगेगी |
  • चेक पोस्ट पर वेरिफिकेशन के दौरान समय कम लगेगा क्योंकि यह पूरा सिस्टम ऑनलाइन है |
  • माल की आवाजाही एवं परिवहन की ट्रैकिंग करना आसान होगा |
  • इस व्यवस्था में ट्रांसपोर्टर या कारोबारी को अलग अलग राज्यों में अलग अलग व्यवस्था से नहीं जूझना पड़ेगा |
  • कारोबारी या ट्रांसपोर्टर को E way bill number खो जाने का भय नहीं रहेगा क्योंकि यह ऑनलाइन मौजूद रहेगा |
  • सरकार को कर प्रणाली पर निगरानी रखने में आसानी होगी और कारोबारियों एवं अधिकारीयों की मिलीभगत में भी गिरावट आएगी जिससे भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी |

ई वे बिल सम्बन्धी अन्य नियम (Other Rules related E way bill):

  • यदि E way bill में किसी प्रकार की कोई गलत एंट्री हो गई हो तो उसे एडिट और सही नहीं किया जा सकता है | बल्कि इस स्थिति में केवल एक विकल्प बचता है वह है पुराने को कैंसिल करके नया ई वे बिल जनरेट करने का |
  • माल ट्रांसपोर्ट के दौरान व्यक्ति को अपने पास बिल या चालान में से किसी एक की कॉपी और E way bill number रखना जरूरी है |
  • यदि ई-वे बिल की वैधता समाप्त हो जाती है, तो इस स्थिति में माल को स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए । लेकिन कुछ असाधारण परिस्थितियों में ट्रांसपोर्टर वैधता के समय को फॉर्म GST EWB-01 के Part B को अपडेट करके बढ़ा सकता है |
  • बहुत सारे सामान ऐसे हैं जिन्हें सरकार ने E way bill System से बाहर रखा हुआ है इनमें मुख्य रूप से एलपीजी, केरोसिन, अखबार, नॉन जुडिशल स्टाम्प पेपर, करेंसी, ज्वेलरी, खादी, पूजा सामग्री, देश का झंडा, नगर निगम का कचरा इत्यादि सम्मिलित है |

About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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