Gerbera Farming से भले ही आप अनभिज्ञ क्यों न हों, लेकिन जरबेरा एक फूल होता है, इसलिए यह फूलों के उत्पादन से जुड़ी हुई खेती है । और यह तो हम सब जानते हैं की सोने, चाँदी, हीरे, मोती, जवाहरात को भले ही मनुष्य महंगे एवं सुन्दर आभूषण समझता हो, लेकिन स्वयं ईश्वर द्वारा बनाये गए सुन्दर फूल भी किसी आभूषण से कम नहीं होते हैं। फूलों की सुगंध और इनकी मनमोहक छवि मनुष्य की इन्द्रियों को उत्तेजित करने का काम करती हैं, फूलों को देखकर हमें लगता है की ईश्वर ने इन कोमल कृतियों की संरचना मनुष्य को जीवन की बहुत सारी सीख देने के लिए की है ।

इन्हीं फूलों में से जरबेरा भी एक फूल है, जिसे फूलों की एक विशेष रचना के तौर पर देखा जा सकता है। इसलिए आज हम हमारे इस लेख में Gerbera Farming के बारे में वार्तालाप कर रहे हैं। जरबेरा फूल सूरजमुखी परिवार का ही एक फूल है, और इसका पौधा आम सजावटी पौधों में से भी एक है। फूल के बीच का रंग काला होता है। जरबेरा के एक फूल में ही अलग अलग रंग की पंखुड़ियाँ भी हो सकती हैं। इस फूल का नाम जर्मनी के महान प्रकृतिवादी Traugott gerber के नाम पर रखा गया है जरबेरा अफ़्रीकी फूलों के पौधों के परिवार (एस्टेरसिया) की एक प्रजाति है।

इसमें कुआरामिन का नैसर्गिक तौर पर उत्पन्न होने वाला डेरिवेटिव होता है। जरबेरा कई रूपों और विभिन्न रंगों में उपलब्ध है, और इन्हें सबसे खुबसूरत फूलों में से एक जाना जाता है। जरबेरा को घरों के फूलदान में भी उगाया जा सकता है ये मनुष्य के जीवन में रंग भरने में अहम् योगदान देता है। ये लगभग 7 inch तक माप के होते हैं और इनका उपयोग फ्लावर बेड या सीमाओं पर बीडिंग प्लांट के तौर पर किया जा सकता है, इन फूलों की प्रकृति बारहमासी होती है।

वर्तमान में आधुनिक हाई टेक पद्यति में Gerbera Farming पालीहाउस में भी की जा सकती है, पालीहाउस के तहत उगाये जाने वाले फूलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। वह इसलिए क्योंकि पालीहाउस के अन्दर तापमान, आर्द्रता, प्रकाश, वेंटिलेशन इत्यादि को फूलों के अनुकूल नियंत्रित किया जाता है।

Gerbera Farming Business

जरबेरा फार्मिंग क्यों करें ? (Why to Start Gerbera Farming in India):

Gerbera Farming की यदि हम बात करें तो यह पूरे विश्व में की जाती है, क्योंकि जरबेरा के पौधे सजावटी पौधों के तौर पर काफी लोकप्रिय हैं। और जहाँ तक इसके फूलों की बात है, इनका इस्तेमाल गुलदस्ते बनाने और सजावट प्रयोजनों के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। जरबेरा के फूलों की मांग इसलिए भी बहुत अधिक है क्योंकि ये बिना ताजगी और खुशबू खोये हुए बड़े लम्बे समय तक रह सकते हैं। कहने का आशय यह है की जिस प्रकार अन्य फूल बड़ी जल्दी या कम समय में मुरझा जाते हैं, वहीँ जरबेरा के फूल उनकी तुलना में अधिक समय तक खिले हुए रहते हैं ।

शायद यही कारण है की इस तरह के इन फूलों का इस्तेमाल शादियों, पार्टियों एवं अन्य आयोजनों में अधिक किया जाता है। अपने देश भारतवर्ष की यदि हम बात करें तो यहाँ कटे हुए फूलों का बाजार बहुत अधिक असंगठित है, और देखा गया है की बड़े शहरों और महानगरों में भी ऐसे थोक बाज़ारों में लाकर बेचा जाता है जो आम तौर पर खुले होते हैं, अर्थात खुले यार्डों के माध्यम से ही फूलों को थोक बाज़ारों में बेचा जाता है।

Gerbera Farming शुरू करने वाले इच्छुक उद्यमी को इस बात की जानकारी अवश्य होनी चाहिए की, भारत में ऐसे कुछ ही बड़े व्यापारी हैं जो बड़ी मात्रा में फूल खरीदते हैं। और उनमें महत्वपूर्ण मार्क अप के बाद उन्हें रिटेल विक्रेताओं को बेचते हैं। रिटेल विक्रेता भी आम तौर पर सड़क किनारे खुली जगहों पर फूलों की बाल्टियों का इस्तेमाल करके फूल बेच रहे होते हैं। महानगरों में भी ऐसे बेहद कम फूलों के स्टोर एवं शोरूम होते हैं, जहाँ इन्हें नियंत्रित तापमान में रखकर बेचा जाता है।

शायद यही कारण है की सरकार भी इस क्षेत्र को संगठित करने की ओर प्रयासरत है, और फ्लोरीकल्चर के विकास के लिए विभिन्न राज्यों की सरकार और केंद्र सरकार ने विभिन्न कार्यक्रम चलाये हुए हैं। इसलिए Gerbera Farming Business शुरू करने से पहले उद्यमी को इसके बाजार के बारे में जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। कहने का आशय यह है की उद्यमी को इस बात का पहले से पता होना चाहिए की वह अपने द्वारा उत्पादित फूलों को कहाँ बेचेगा?।

भारत में फ्लोरीकल्चर की संभावना, निर्यात इत्यादि पर और अधिक जानकारी के लिए आप कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की अधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

जरबेरा फूलों का उत्पादन कैसे शुरू करें? (How to Start Gerbera Farming): 

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की वर्तमान में Gerbera Farming पालीहाउस के माध्यम से की जाती है कहने का आशय यह है की आधुनिक हाई टेक पद्यति में काटने योग्य फूलों को पालीहाउस में उगाया जाता है। और इनमें उगाये जाने वाले फूलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है, क्योंकि इन्हें जलवायु को नियंत्रित करके उगाया जाता है।

अर्थात पाली हाउस के अन्दर तापमान, आर्द्रता, प्रकाश, वेंटिलेशन को नियंत्रित करके फूलों और पौधों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाता है। यहाँ तक की इस पद्यति के तहत वाटर एप्लीकेशन को भी नियंत्रित किया जाता है।

उत्पादन करने के लिए आवश्यकता

पालीहाउस में Gerbera Farming के लिए क्या क्या आवश्यकता हो सकती है उनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है । 

प्लांटिंग मीडियम:

प्लांटिंग मीडियम यानिकी जिनमें पौधे लगाने की योजना हो उनमें छिद्र और निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। बड़े फूलों की खेती के लिए प्रति स्क्वायर मीटर में केवल 8-10 पौधों का ही रोपण आदर्श माना गया है, आम तौर पर दो पंक्ति वाले या चार पंक्ति वाली रोपण प्रणाली का इस्तेमाल पाली हाउस के अन्दर इस प्रकार की खेती करने के लिए किया जाता है।

 Gerbera Farming के लिए प्लांटिंग टाइम

वैसे देखा जाय तो Gerbera Farming करने वाला उद्यमी पूरे वर्ष के दौरान कभी भी इस तरह के पौधों का रोपण कर सकता है लेकिन आम तौर पर सितम्बर से अक्टूबर का समय रोपण के लिए आदर्श माना जाता है। यदि उद्यमी इन पौधों से जरबेरा के फूलों का उत्पादन करना चाहता है तो उसे इन पौधों को दो साल तक ज्यों का त्यों छोड़ने की आवश्यकता होती है।

GA3 (100 ppm) के साथ लम्बे तने वाले फूलों का उत्पादन थोड़ा जल्दी किया जा सकता है। इनके उत्पादन के लिए दिन में 16-200C तापमान की आवश्यकता होती है, वहीँ रात के समय यह  120C होना चाहिए।

हार्वेस्टिंग

जरबेरा फूल की हार्वेस्टिंग यानिकी कटाई का चरण भी बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इन फूलों को तब तक नहीं काटा जाना चाहिए, जब तक की फूलों की बाहरी पंक्ति में पराग न दिखाई दे। इसलिए इस तरह की खेती कर रहे उद्यमी या किसान को कटाई के समय भी काफी सावधानी और समझदारी से काम लेने की आवश्यकता होती है।

Gerbera Farming करने वाले किसान या उद्यमी जरबेरा के फूलों को उपयुक्त तापमान (40C) और नियंत्रित वातावरण में चार हफ़्तों तक स्टोर में संरक्षित करके रख सकते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक एक वर्ष में प्रति स्क्वायर मीटर जगह में 250-300 गुणवत्तायुक्त फूल उगाये जा सकते हैं।     

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