Desi Ghee से तो हम सब अच्छी तरह से अवगत हैं। क्योंकि इसका इस्तेमाल न सिर्फ घरों में अनेकों व्यंजन एवं पकवान बनाने के लिए होता है। बल्कि, खान पान के उद्योग वह भी विशेषकर ब्रांडेड मिठाई बनाने के उद्योग में देसी घी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। जहाँ तक घरों में इसके इस्तेमाल का सवाल है, राज्य एवं उनके खान पान की शैली के अनुसार इसके इस्तेमाल भी अलग अलग हो सकते हैं। यदि आप ग्रामीण इलाकों से सम्बद्ध रखते हैं, तो आपको आपकी Desi Ghee सम्बन्धी आवश्यकता की पूर्ति के लिए किसी ब्रांडेड देशी घी बनाने वाली कंपनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

क्योंकि आज भी ग्रामीण इलाकों में लोगों के रोजगार का प्रमुख साधन कृषि और पशुपालन ही है। इसलिए लोगों द्वारा दूध से घी बनाने की पारम्परिक प्रक्रिया को ही अपनाया जाता है और ग्रामीण इलाकों में लोग एक दुसरे से ही देशी घी खरीदकर अपनी इस आवश्यकता की पूर्ति कर लेते हैं। लेकिन जब बात शहरों की आती है तो शहरी इलाकों में निवासित लोग Desi Ghee सम्बन्धी आवश्यकता की पूर्ति के लिए ब्रांडेड कम्पनियों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी बाज़ारों में देशी घी के नाम पर तरह तरह के नकली घी बिक रहे होते हैं।

जबकि शहरों में ऐसे लोगों की भी कोई कमी नहीं है जो शुद्ध बिना मिलावट के देशी घी पर अधिक पैसे खर्च करने से गुरेज नहीं करते हैं। कहने का आशय यह है की भले ही देशी घी की मांग सर्वत्र है, लेकिन उद्यमी खुद का Desi Ghee Manufacturing Business शहरी लोगों को टारगेट करके ही शुरू कर सकता है । इससे पहले की हम देशी घी निर्माण के व्यवसाय के बारे में विस्तार से बात करें आइये जानते हैं, की यह होता क्या है?

Desi Ghee Manufacturing Business

देशी घी क्या होता है (What is Desi Ghee):

घी की यदि हम बात करें तो यह शब्द संस्कृत शब्द घृत से विकसित हुआ है और यह भारत में और मध्य पूर्व के कई देशों में सबसे प्रसिद्ध पारम्परिक डेयरी उत्पादों में से एक है। घी को गाय, भैंस एवं अन्य कई प्रजातियों के जानवरों के दूध, क्रीम या मक्खन से बनाया जाता है। घी स्पष्ट मक्खन बसा के लिए एक आम भारतीय नाम है जिसकी उत्पति भारत में हुई है और इसे दक्षिण एशियाई व्यंजनों में इस्तेमाल में लाया जाता है, घी लैक्टोज मुक्त होने के साथ साथ नमक मुक्त भी होता है।

Desi Ghee की यदि हम बात करें तो यह हलके पीले रंग का सुनहरे तरल की तरह दिखाई देता है और यह दूध से बनने वाला बेहद स्वादिष्ट घटक है। इसलिए किसी भी भोजन में थोड़ी सी ही मात्रा में देशी घी शामिल करना उस भोजन के स्वाद को कई गुना तक बढ़ा देता है। यह एक डेरी उत्पाद है इसलिए यह ग्लूटेन मुक्त भी होता है।

देशी घी की बिक्री संभाव्यता ( Market Potential of Desi Ghee):

किसी भी उत्पाद की बिक्री कितनी होगी उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की उसका इस्तेमाल किन किन उद्देश्यों के लिए कितनी मात्रा में किया जाता है। Desi Ghee की यदि हम बात करें तो यह हर भारतीय रसोई में पाया जाने वाला एक प्रमुख और बेहद स्वादिष्ट घटक है। कहने का आशय यह है की घी का इस्तेमाल भारतीय खाना पकाने में व्यापक तौर पर किया जाता है इसकी उत्पति दूध के ठोस पदार्थ जैसे मक्खन से पानी हटाने के बाद होती है।

इसलिए इसकी खुशबु और स्वाद बेहद बढ़िया होता है और लगभग सभी लोगों द्वारा इसे अच्छा खासा पसंद किया जाता है और एक आंकड़े के मुताबिक डेयरी उत्पादों में दूध के बाद सबसे अधिक खपत देशी घी की ही होती है। इसके अलावा बढ़ रही जनसँख्या, लोगों की बढती डिस्पोजेबल आय, लोगों को देशी घी के सेवन से होने वाले लाभों की बढ़ती जानकारी के साथ भी इसकी मांग बढती जा रही है। Desi Ghee को प्रमुख तौर पर निम्नलिखित इस्तेमाल में लाया जाता है।

  • इसे खाना पकाने की बसा के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है।
  • आइसक्रीम बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • कन्फेक्शनरी उद्योग में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
  • इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के वसा प्रसार के निर्माण में भी किया जाता है ।
  • घी में ए, डी, ई जैसे वसा में घुलनशील विटामिन होते हैं जो शाकाहारी व्यक्तियों को लाभ पहुँचाने में सहायक होते हैं।
  • Desi Ghee बुद्धि, स्मरण शक्ति और शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करता है।

देशी घी के उपर्युक्त उपयोगों और फायदों को देखते हुए कहा जा सकता है आने वाले दिनों में इसकी मांग और बढ़ने वाली है इसलिए यदि कोई उद्यमी देशी घी बनाने का व्यवसाय शुरू करता है तो यह उसके लिए लाभकारी हो सकता है।

देशी घी बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? (How to Start Desi Ghee Manufacturing Business)

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की Desi Ghee बनाने का यह काम भारत में प्राचीन समय से ही चला आ रहा है, इसलिए वर्तमान में भी जो लोग पशु पालन करते हैं वे अपने खाने के लिए देशी घी का निर्माण अपने घरों में ही कर देते हैं। यदि उन्हें लगता है की उनके पास उपलब्ध घी उनकी आवश्यकता से अधिक है तो वे उसे बेच भी देते हैं।

इसलिए कहा जा सकता है की देशी घी बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए उद्यमी को किसी प्रशिक्षण इत्यादि की आवश्यकता तो नहीं है क्योंकि आम तौर पर मट्ठे से मक्खन को अलग करके और फिर उस मक्खन को आग में तपाकर देशी घी का निर्माण किया जाता है। इसलिए यदि उद्यमी दूध से घी का निर्माण करना जानता भी न हो, तब भी वह इस प्रक्रिया को केवल कुछ मिनटों या घंटों में सीख सकता है। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक उद्यमी खुद का Desi Ghee Manufacturing Business शुरू कर सकता है।

1. जमीन या दुकान का प्रबंध

वैसे छोटे स्तर पर या ग्रामीण स्तर पर उद्यमी Desi Ghee Manufacturing Business को अपने घर से भी शुरू कर सकता है एक ऐसे उद्यमी जो पहले से पशुपालन कर रहा हो या डेयरी फार्म बिजनेस में संग्लिप्त हो वह अपने जानवरों से उत्पादित दूध से देशी घी बनाने का कार्य शुरू कर सकता है।वर्तमान में बाजार में नकली घी भी आने लगा है। यही कारण है की लोग अक्सर एक ऐसे उद्यमी से देशी घी खरीदना पसंद करते हैं। जिसके पास स्वयं के जानवर उपलब्ध हों।

ध्यान रहे घर से उद्यमी केवल प्रायोगिक तौर पर या फिर बेहद छोटे स्तर पर ही इस व्यवसाय को शुरू कर सकता है यदि उद्यमी व्यवसायिक तौर पर फुल टाइम देकर यह बिजनेस करने की योजना बना रहा है तो उसे किसी स्थानीय बाजार में जगह या दुकान का प्रबंध करने की आवश्यकता तो होगी ही होगी।यद्यपि यह अलग बात है की उद्यमी को इस व्यवसाय के लिए बहुत बड़ी दुकान या जगह की आवश्यकता नहीं होगी लेकिन फिर भी यह इस बात पर निर्भर करेगा की उद्यमी केवल देशी घी का निर्माण करने की योजना बना रहा है या फिर दूध से उत्पादित होने वाले अन्य उत्पाद जैसे पनीर, मक्खन, दही इत्यादि भी बेचने की योजना बना रहा है।    

2. दूध सप्लायर से संपर्क करना

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की यदि Desi Ghee Manufacturing Business शुरू करने वाला उद्यमी कोई ऐसा व्यक्ति है, जो पहले से डेयरी फार्म इत्यादि के माध्यम से पशुपालन करके दुग्ध उत्पादन कर रहा है। तो उसे दूध सप्लायर से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन यदि उद्यमी इतने दूध का उत्पादन नहीं कर पाता जितना उसे उसकी इकाई के लिए आवश्यकता है तो उसे अन्य दूध सप्लायर से भी संपर्क करने की आवश्यकता होगी। क्योंकि देशी घी बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर केवल और केवल दूध की ही आवश्यकता होती है। उद्यमी चाहे तो उस एरिया में स्थित पशुपालकों से संपर्क कर सकता है या फिर किसी डेयरी इत्यादि से भी दूध खरीद सकता है।    

3. आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण (License for Desi Ghee Manufacturing)

Desi Ghee की मांग हर जगह व्यापत है और शहरों में शुद्ध देशी घी के लिए लोग अधिक कीमत देने को भी तत्पर रहते हैं। यदि उद्यमी स्थानीय लोगों की घी सम्बन्धी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही इस व्यवसाय को शुरू कर रहा है तो हो सकता है की उद्यमी को FSSAI License के अलावा अन्य किसी लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता इसके लिए न हो। लेकिन यदि उद्यमी स्वयं का ब्रांड स्थापित करके शहरों तक अपने उत्पाद को बेचने की योजना बना रहा है तो उसे कई लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो सकती है जिनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • सबसे पहले उद्यमी को अपने व्यवसाय को रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में प्रोप्राइटरशिप या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर करना होगा।
  • बिलिंग, इनवॉइस के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम, नगर पालिका इत्यादि से ट्रेड लाइसेंस की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • खाद्य उत्पाद होने के कारण उद्यमी को एफएसएसआई लाइसेंस की अनिवार्यता होगी।
  • उद्यमी चाहे तो अपने व्यवसाय को उद्योग आधार और एमएसएमई डाटा बैंक में भी रजिस्टर करवा सकता है।  

4. आवश्यक मशीनरी और उपकरण

Desi Ghee Manufacturing व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रमुख और एकमात्र कच्चा माल दूध है यद्यपि पैकिंग सामग्री की आवश्यकता होती है लेकिन घी बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर केवल दूध की आवश्यकता होती है। जहाँ तक मशीनरी और उपकरणों का सवाल है इनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • मिल्क स्टोरेज टैंक
  • बैलेंस टैंक
  • मिल्क Homogenizer
  • मिल्क पेस्च्युराइजर
  • क्रीम सेपेरटर
  • बायलर
  • पम्प
  • चीलर
  • बटर चर्निंग मशीन
  • घी बोइलिंग केतली
  • आईबीटी टाइप चिल्लिंग मशीन
  • पाउच फिलिंग मशीन
  • अन्य मशीनरी और उपकरण         

5. घी का निर्माण शुरू करना (Process of Desi Ghee Manufacturing ):

Desi Ghee निर्माण प्रक्रिया से तो आप सभी अच्छी तरह से अवगत होंगे हो सकता है की राज्यों के आधार पर देशी घी बनाने की प्रक्रिया में थोड़ा बहुत परिवर्तन हो। लेकिन जो एक घरेलु पद्यति हमें ज्ञात है इस घरेलू पद्यति से देशी घी बनाने के लिए सबसे पहले दूध के दही के तौर पर जमा दिया जाता है उसके बाद उस दही को मथकर मट्ठे के स्वरूप में बदल दिया जाता है। दही को मट्ठे में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में मट्ठे के ऊपर मक्खन अलग हो जाता है और फिर इस मक्खन को मट्ठे से निकाल दिया जाता है और इस मक्खन को गर्म करके देशी घी का निर्माण किया जाता है। ध्यान रहे जो घी निर्माण की पद्यति हमने उपर्युक्त बताई है वह घरेलु है व्यवसायिक तौर पर मशीनों से Desi Ghee का निर्माण करने के लिए अलग सी पद्यति अपनाई जाती है जिसका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार से है।

  • इस प्रक्रिया में ख़रीदे गए दूध को स्टोरेज टैंक में डाला जाता है और जब भी आवश्यकता हो दूध को गरम करने के लिए आवश्यक भाप उत्पन्न करने के लिए बायलर का इस्तेमाल किया जाता है।
  • बायलर से उत्पन्न भाप का इस्तेमाल दूध को गर्म करके पाश्च्युरीकृत करने के लिए किया जाता है और उचित समय के बाद दूध को दुसरे होल्डिंग टैंक में भेज दिया जाता है यह टैंक दूध को ठंडा करने से पहले उसे स्टोर कर लेता है।
  • जब दूध ठंडा हो जाता है तो उसे एक होल्डिंग टैंक में स्टोर किया जाता है जहाँ से इसे milk homogenizer को सप्लाई किया जाता है यह सुनिश्चित करता है की दूध में एक समान ग्लोब्युल आकार उपलब्ध हो।
  • इसके बाद दूध को बैलेंस टैंक में स्टोर करके रखा जाता है और इसी टैंक से इसे क्रीम सेपेरटर में डाला जाता है। Desi Ghee Manufacturing Process में क्रीम सेपेरटर का काम दूध से क्रीम को अलग करने का होता है।
  • क्रीम सेपेरटर के माध्यम से दूध से क्रीम अलग होने पर उसे एक अलग टैंक और टोंड दूध को अलग टैंक में भेज दिया जाता है जहाँ से टोंड दूध को थैली या पाउच में पैक करके बेचने के लिए भेज दिया जाता है ।
  • दूध से अलग की गई क्रीम को एक चिलर के माध्यम से ठंडा किया जाता है और इसके तापमान को 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जाता है उसके बाद इस क्रीम को बटर चर्निंग मशीन में डाला जाता है।
  • बटर चर्निंग मशीन द्वारा क्रीम से बटर को अलग कर लिया जाता है और इस मक्खन को गरम करने वाले एक बर्तन में डाला जाता है यह बर्तन Desi Ghee का निर्माण करने के लिए मक्खन को गरम करता है। घी का निर्माण होने के बाद उसे पाउच या डिब्बों में पैक करके बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है। 

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