Kishmish Manufacturing पर बात करना इसलिए बेहद जरुरी हो जाता है क्योंकि यह एक सामान्य सी खाद्य आइटम है जिसका इस्तेमाल विभिन्न व्यजनों में किया जाता है। आम तौर पर मिठाई और मिठाई से सम्बंधित उत्पादों को बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है, घरों में भी विभिन्न मीठे पकवानों में इनका इस्तेमाल देखा गया है। अब चूँकि Kishmish Manufacturing आम तौर पर कच्चे माल के तौर पर अंगूरों को इस्तेमाल में लाकर की जाती है। इसलिए किशमिश विनिर्माण इकाई को स्थापित करने की योजना एक ऐसे क्षेत्र को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। जहाँ अंगूरों का उत्पादन अधिक होता हो ताकि उद्यमी को कच्चा माल आसानी से और उचित दामों में प्राप्त हो सके। किशमिश का इस्तेमाल लगभग सभी लोगों द्वारा किया जाता है इसलिए यह एक स्वीकार्य उत्पाद है। और यदि चयनात्मक वातावरण में इसकी इकाई शुरू की जाय तो यह एक बेहद लाभकारी व्यवसाय के तौर पर सामने आ सकता है। क्योंकि किशमिश एक ऐसा उत्पाद है जिसे उद्यमी घरेलु बाजार में तो बेच ही सकता है साथ में विदेशों की ओर निर्यात करके भी अच्छा मुनाफा कमा सकता है, बशर्ते की उसके उत्पाद का उत्पादन अंतरराष्ट्रीय मानक गुणवत्ता के अनुसार हुआ हो । लेकिन इसके बावजूद भी Kishmish Manufacturing Business करने वाले उद्यमी को व्यवसाय के शुरूआती दिनों में केवल और केवल घरेलु बाजार पर ही ध्यान देना होगा, और घरेलु बाजार में ग्राहकों में अपने उत्पाद के प्रति एक विश्वास पैदा करना होगा। उसके बाद धीरे धीरे उद्यमी निर्यात की ओर भी अपने कदम बढ़ा सकता है उद्यमी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी की उसके द्वारा उत्पादित उत्पाद का उत्पादन कितनी स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का पालन करके हो रहा है। उच्च स्तर की किशमिश निर्माण के लिए इन्हें 80-85% तक डीहाइड्रेट किया जाता है।

Kishmish manufacturing Business in Hindi

उत्पाद और इसके अनुप्रयोग

किशमिश एक ऐसा उत्पाद है जो मीठा, स्वादिष्ट और शानदार होता है इसका उपयोग लोग ड्राई फ्रूट के तौर पर भी करते हैं यानिकी इसे स्नैक्स के तौर पर भी खाया जा सकता है। और यह किसी भी पसंदीदा व्यंजन में अतिरिक्त स्वाद भी जोड़ सकता है इसलिए इसका इस्तेमाल विभिन्न स्वीट डिश बनाने में भी किया जाता है। कहने का आशय यह है की लोग किशमिश को स्नैक्स के तौर पर या फिर ऐसे ही चलते चलते हाथ से खाना, किसी व्यंजन और फलों में मिलाकर खाना पसंद करते हैं । किशमिश का इस्तेमाल पारम्परिक व्यंजनों जैसे पुलाव या हलवा में भी किया जाता है। और वर्तमान में तो इसका पल्प बनाकर, जूस बनाकर, पेस्ट बनाकर, अनाज, स्नैक्स और दूध के साथ बड़े पैमाने पर किया जाता है। यदि दैनिक आहार के तौर पर किशमिश का इस्तेमाल किया जाता है तो यह पोषक तत्व, घुलनशील और अघुलनशील फाइबर एवं स्वास्थ्य सुरक्षा बायोएक्टिव यौगिक प्रदान करता है। इस उत्पाद ने स्वास्थ्य पहलुओं पर अपने प्रभाव को हमेशा साबित किया है इसलिए कहा जाता है की किशमिश अनेकों रोगों जैसे कब्ज, हृदय रोग, मधुमेह, पेट के कैंसर और मोटापे के जोखिम को कम करता है। इसके अलावा किशमिश ब्रेड, मफिन, कुकीज़, केक, पाई, तीखा, हलवा,खीर इत्यादि में एक अलग ही चमक बिखेर देता है। बेकरी उत्पादों की यदि हम बात करें तो ये खाद्य उद्योग के प्रमुख आकर्षण में से एक है। चूँकि बेकरी उत्पादों में किशमिश का इस्तेमाल अधिक होता है इसलिए यह Kishmish Manufacturing Business के महत्व को और बढ़ा देता है। किशमिश एक मीठा उत्पाद है इसलिए कई व्यंजन ऐसे होते हैं जहाँ पर चीनी की जगह किशमिश का इस्तेमाल किया जाता है।

मार्किट और चुनौतियाँ  (Market & Challenges in Kishmish Manufacturing Business):

Kishmish Manufacturing परियोजना की यदि हम बात करें तो यह पूर्ण रूप से कच्चे माल यानिकी अंगूरों की उपलब्धता पर निर्भर है। चूँकि अंगूर एक मौसमी फल है इसलिए इसी बात को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है की इस तरह का यह बिजनेस जुलाई और सितम्बर के बीच शुरू किया जा सकता है। हालांकि वर्ष भर उत्पादन जारी रखने के लिए अंगूरों की अन्य किस्मों का भी इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर किया जा सकता है। प्रसंस्कृत किशमिश के टारगेट ग्राहक के तौर पर ड्राई फ्रूट बेचने वाले विक्रेता, खुदरा विक्रेता, मिष्ठान और दवा उद्योग शामिल हैं । इसलिए जब उद्यमी द्वारा घरेलु बाजार पर लगभग कब्ज़ा कर लिया जाय या घरेलु स्तर पर ग्राहकों का विश्वास हासिल कर लिया जाय उसके बाद ही उद्यमी अपने उत्पाद को निर्यात करके अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में उतारने की योजना बना सकता है।

किशमिश निर्माण बिजनेस कैसे शुरू करें? (How to Start Kishmish Manufacturing Business):

अब तक एक बात तो स्पष्ट हो चुकी है की Kishmish Manufacturing Business शुरू करने के लिए जो सबसे पहला कदम होता है। वह होता है एक अच्छी सी लोकेशन का चुनाव करने का। और इसमें अच्छी लोकेशन से आशय किसी साफ़ सुथरी लोकेशन से नहीं, बल्कि एक ऐसी लोकेशन से है जहाँ पर अंगूरों का उत्पादन अधिक होता है। और यह इसलिए जरुरी होता है ताकि उद्यमी को अपने इकाई के लिए कच्चा माल आसानी से और उचित दामों में उपलब्ध हो सके। और वह इस प्रतिस्पर्धी बाजार में अपने ग्राहकों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य पर किशमिश उपलब्ध करा सके। अच्छी लोकेशन का चयन करने के अलावा भी इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए और भी कई जरुरी कदम उठाने की आवश्यकता होती है तो आइये जानते हैं वे कदम कौन कौन से हैं।

1. जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करें

Kishmish Manufacturing Business शुरू करने के लिए सबसे पहले उद्यमी को एक अच्छी लोकेशन का चयन करना होता है। और उसके बाद उस चयनित लोकेशन पर जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करना होता है। जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करने के लिए हमेशा उद्यमी के पास दो तीन रस्ते उपलब्ध होते हैं जिनमें स्वयं की जमीन, किराये और लीज पर ली गई जमीन और बिल्डिंग शामिल है। यदि उस चयनित लोकेशन पर उद्यमी के पास स्वयं की कोई जमीन है तो उद्यमी उसी जमीन पर इकाई स्थापित करने की योजना बन सकता है। लेकिन ध्यान रहे की उद्यमी को विनिर्माण स्थल, स्टोर रूम, बिजली उपयोगिताओं के लिए जगह और एक छोटा सा ऑफिस स्थापित करने के लिए भी जगह की आवश्यकता होती है। इसलिए इस प्रकार से देखें तो उद्यमी को 1000-1200 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता हो सकती है। यदि ऐसा नहीं है तो उद्यमी उस चयनित लोकेशन पर कोई बनी बनाई बिल्डिंग अपने इस कार्य को करने के लिए किराये पर ले सकता है।

2. वित्त का प्रबंध करें (arrange fund to start Kishmish Manufacturing Business)

वित्त का प्रबंध करने से पहले उद्यमी को अपने व्यवसाय के लिए एक प्रभावी बिजनेस प्लान बनाने की आवश्यकता होगी। यह इसलिए भी जरुरी हो जाता है क्योंकि इसमें व्यवसाय से जुड़ी समस्त बातों का उल्लेख होने के साथ प्लांट की उत्पादन क्षमता का भी ब्यौरा होता है। यदि उद्यमी का बजट कम है तो उद्यमी कम उत्पादन क्षमता की इकाई स्थापित करने की योजना बना सकता है । और यदि बजट का कोई मामला नहीं है तो फिर उद्यमी अपने क्षमतानुसार कितनी भी उत्पादन क्षमता का प्लांट स्थापित कर सकता है। बिजनेस प्लान के तहत ही एक दस्तावेज प्रोजेक्ट रिपोर्ट के तौर पर होती है। जिससे उद्यमी को उसके Kishmish Manufacturing Business को शुरू करने में आने वाली अनुमानित लागत का तो पता चलेगा ही, साथ में भविष्य में होने वाली अनुमानित कमाई का भी पता चल पायेगा। उद्यमी को चाहिए की प्रोजेक्ट रिपोर्ट में जितनी अनुमानित लागत आ रही हो उससे थोड़ा सा अधिक ही वित्त का प्रबंध करके अपने पास रखे, ताकि बीच में कुछ भी जरुरत पड़ने पर उस वित्त का इस्तेमाल किया जा सके। वित्त का प्रबंध करने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले सब्सिडी ऋण, बैंक ऋण या फिर अपनी व्यक्तिगत बचत ही प्रमुख स्रोत हैं।

3. लाइसेंस और पंजीकरण लें

खुद का Kishmish Manufacturing Business शुरू करने के लिए उद्यमी को निम्नलिखित लाइसेंस और पंजीकरण कराने की आवश्यकता हो सकती है।

  • अपनी इकाई को रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज में रजिस्टर कराना
  • बिलिंग इनवॉइस इत्यादि के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन
  • बैंक में व्यवसाय के नाम से चालू खाता
  • स्थानीय प्राधिकरण से ट्रेड लाइसेंस
  • एफएसएसएआई लाइसेंस
  • उद्यम रजिस्ट्रेशन
  • खुद का ब्रांड और उसकी सुरक्षा के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन   

4. मशीनरी और कच्चा माल खरीदें (Required Machinery to Start Kishmish Manufacturing unit):

Kishmish Manufacturing Business में इस्तेमाल में लायी जाने वाली प्रमुख मशीनरी और उपकरणों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • फ्रूट वॉशर एंड ड्रायर।
  • सोर्टिंग एंड ग्राइंडिंग मशीन।
  • पैकेजिंग मशीन।
  • मापक यंत्र।
  • अन्य सामग्री हैंडलिंग उपकरण जैसे क्रेट।
  • सीलिंग मशीन।
  • अन्य टूल और उपकरण।

आवश्यक कच्चे माल की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • अंगूर।
  • प्रज्रवेटिव।
  • HDPE Boxes।
  • पैकिंग सामग्री ।   

5. निर्माण कार्य शुरू करें (Start Kishmish Manufacturing Process):     

अच्छी गुणवत्तायुक्त किशमिश का उत्पादन करने के लिए यह बेहद जरुरी होता है की ख़रीदे गए अंगूरों की गुणवत्ता भी बेहद अच्छी हो। अंगूर की खेती की यदि हम बात करें तो यह एक साल के लिए होती है और अच्छे अंगूरों का उत्पादन हो, इसके लिए प्रूनिंग, सिंचाई, निषेचन और कीट नियंत्रण इत्यादि प्रथाओं को बखूबी निभाना पड़ता है। कहने का आशय यह है की Kishmish Manufacturing के लिए सबसे पहले उद्यमी द्वारा सभी आवश्यक कच्चा माल विशेषकर अंगूर स्थानीय किसानों या स्थानीय सप्लायर से खरीद लिए जाते हैं और फिर उन्हें अच्छी तरह धोया जाता है उसके बाद उनकी सोर्टिंग की जाती है ताकि अलग अलग तरह की किशमिश का निर्माण किया जा सके। अंगूर के दाने छोटे होंगे तो किशमिश भी छोटी होगी और अंगूर के दाने बड़े होंगे तो किशमिश के दाने भी बड़े होंगे। क्योंकि किशमिश बनाने की प्रक्रिया में अंगूर के दानों को दो चार हफ़्तों के लिए ट्रे पर सूखने के लिए रखा जाता है इस दौरान इनमें नमी 75% से केवल 15% ही रह जाती है और इनका रंग भूरे बैगनी रंग में बदल जाता है। जब फल सूख जाते हैं तो उसके बाद इनके चारों तरफ पेपर ट्रे को रोल किया जाता है, ताकि इनके पैकेज बनाये जा सकें। और इन पेपर रोल को प्रोसेसिंग प्लांट में ले जाने से पहले बॉक्स में स्टोर करके स्टोर रूम में रखा जाता है उसके बाद जब इन्हें विनिर्माण संयंत्र में पहुँचाया जाता है तो Kishmish Manufacturing Process में इनमें से अशुद्धियों को दूर किया जाता है इस प्रक्रिया के दौरान अपरिपक्व फलों को मशीन द्वारा हटा दिया जाता है। उसके बाद किशमिश को गुच्छों से अलग कर दिया जाता है यदि किशमिश में बीज होते हैं तो मशीन द्वारा इन्हें स्वत: ही हटा लिया जाता है।

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