नाबार्ड को हिंदी में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक कहा जाता है। जबकि अंग्रेजी में NABARD का फुल फॉर्म National Bank for Agriculture and Rural Development है। जैसा की हम सब जानते हैं, की भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए इसकी एक बहुत बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। जो कृषि एवं कृषि से सम्बंधित कार्यों को करके अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।

आज भले ही ग्रामीण इलाकों तक भी थोड़ी बहुत बैंकों की पहुँच हो गई हो, लेकिन 1982 में जब नाबार्ड की स्थापना हुई थी। उस समय ग्रामीण भारत में बैंकिंग सेवाएँ या तो थी ही नहीं, या फिर थी तो बेहद सिमित थी। ग्रामीण भारत की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए 5 नवम्बर 1982 को राष्ट्रीय ग्रामीण और कृषि विकास बैंक की स्थापना हुई।

वर्तमान में नाबार्ड कृषि से जुड़े व्यवसायों, आधुनिक कृषि कार्यों को इस्तेमाल में लाये जाने वाले मशीनरी और उपकरणों और ग्रामीण भारत में रोजगार को प्रोत्साहित करने हेतु अनेकों सब्सिडाइज योजनाएँ चला रहा है। यह बैंक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है।

नाबार्ड नामक इस बैंक के माध्यम से आज भी सरकार ग्रामीण इलाकों में कृषि सम्बन्धी व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के लिए फार्मिंग परियोजनाओं को शुरू करने में आने वाली कुल लागत के एक बड़े हिस्से पर सब्सिडी प्रदान करती है। ताकि किसानों में उद्यमिता की भावना को जगाया जा सके, और ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के अवसर पैदा किये जा सकें।

नाबार्ड राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड क्या है

नाबार्ड एक विकास बैंक है, जो वर्तमान में पूरी तरह भारत सरकार के स्वामित्व में काम कर रहा है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक एक विकास बैंक के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न व्यवसायों जैसे कृषि, लघु उद्योगों, कुटीर उद्योगों, ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण शिल्प से सम्बंधित आर्थिक गतिविधियों के प्रचार प्रसार और विकास के लिए ऋण के साथ साथ अन्य सुविधाएँ भी प्रदान कर रहा है।

एकीकृत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं इससे जुड़ी सहायक गतिविधयों के विकास, प्रचार प्रसार और विनयमन करने के लिए भी नाबार्ड ऋण के साथ साथ अन्य सुविधाएँ भी प्रदान करता है।

नाबार्ड की स्थापना और उद्देश्य

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की, भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले वस्तु विनिमय पर ज्यादा निर्भर थी। इसलिए उन लोगों को संस्थागत ऋण इत्यादि की आवश्यकताएं भी कम पड़ती थी, लेकिन जैसे जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक दुसरे पर निर्भरता कम होने लगी। तो वस्तु विनिमय भी कम होने लगा। तो अब उन्हें जब भी ऋण इत्यादि की आवश्यकता होती, वे साहूकार इत्यादि से ऋण ले लेते थे।

उसके बाद ऋण वसूली के नाम पर ऋणी का शोषण होता था। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संस्थागत ऋण मुहैया कराने के उद्देश्य से इस नाबार्ड योजना की शुरुआत हुई थी। लेकिन इससे पहले भारत सरकार के आग्रह पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने कृषि और ग्रामीण विकास के लिए समीक्षा करने हेतु एक समिति का गठन किया।

इस समिति का गठन 30 मार्च 1979 को श्री बी, शिवरामन जो की भारत सरकार, योजना आयोग के पूर्व सदस्य थे, उनकी अध्यक्षता में हुआ। समिति की अंतरिम रिपोर्ट जिसमें ग्रामीण विकास से जुड़े ऋण सम्बन्धी सभी मुद्दों पर ध्यान दिया गया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने हेतु एक संगठन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया। और इसी सिफारिश के आधार पर 1981 के अधिनियम 61 के माध्यम से संसद में नाबार्ड के गठन को स्वीकार कर लिया गया।

भले ही संसद में नाबार्ड को 1981 में स्वीकार कर लिया गया हो, लेकिन यह 12 जुलाई 1982 से अस्तित्व में आया। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी द्वारा 05 नवंबर 1982 को नाबार्ड को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया गया। इसकी स्थापना 100 करोड़ प्रारम्भिक पूँजी के साथ की गई थी, और 31 मार्च 2020 तक इसका कुल पेड अप कैपिटल 14,080 करोड़ रुपये था। समय समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक और भारत सरकार के शेयरों में हुए संसोधन के मद्देनजर नाबार्ड आज पूरी तरह भारत सरकार के स्वामित्व में काम कर रहा है।

 नाबार्ड के कार्य (Functions Of Nabard in Hindi):

  • कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों का प्रमोशन और विकास करना।
  • पुनर्वित्त, वित्तपोषण और योजना बनाना।
  • जिन परियोजनाओं ने ऋण लिया हो उस परियोजना की निगरानी और पर्यवेक्षण करना नाबार्ड के कार्य में शामिल है।

उपर्युक्त दिए गए कार्यों के अलावा नाबार्ड के कार्यों को प्रमुख रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।

1. ऋण सम्बन्धी (Credit Related):

  • ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और गैर कृषि गतिविधियों हेतु वित्तीय संस्थानों को दीर्घकालिक निवेश ऋण और अल्पकालिक उत्पादन और विपणन ऋण के लिए पुनर्वित्त प्रदान करना।
  • ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे के विकास और सहकारी ऋण संरचना को मजबूत करने के लिए नाबार्ड द्वारा राज्य सरकारों को भी ऋण प्रदान किया जाता है।
  • राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली संस्थाओं, सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, सहकारी विपणन समितियों इत्यादि को वेयरहाउसिंग बुनियादी ढाँचे के लिए ऋण प्रदान करना।
  • सहकारी समितियों, उत्पादक संगठनों, राज्य के स्वामित्व वाले संस्थानों, निगमों, व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों, किसान समूहों, कॉर्पोरेट इत्यादि को यूपीएनआरएम प्रोग्राम के तहत सीधे ऋण प्रदान करना।
  • पूँजी निवेश सब्सिडी योजनाओं का संचालन करना भी नाबार्ड के कार्यों में शामिल है।    

2. गैर ऋण सम्बन्धी कार्य (Non- Credit Related):

  • ऋण योजना बनाना, उनकी निगरानी करना और विभिन्न एजेंसीयों तथा संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करना भी नाबार्ड के कार्यों में शामिल है।
  • ग्रामीण विकास और कृषि ऋण से सम्बंधित मामलों में भारतीय रिज़र्व बैंक, भारत सरकार तथा राज्य सरकारों की निति निर्माण करने में सहायता प्रदान करना।
  • सहकारी समितियों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का संस्थागत विकास और क्षमता विकास करना, ताकि ग्रामीण ऋण वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा सके।
  • राज्य सहकारी बैंकों, जिला सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का स्वैच्छिक निरीक्षण और उनकी ऑफ साईट निगरानी करना।
  • कृषि, गैर कृषि, माइक्रो फाइनेंस, वित्तीय समावेशन, अभिसरण इत्यादि क्षेत्रों में सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों के तहत प्रचार और विकास की पहल शुरू करना।
  • सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के द्वारा किये गए वित्तीय समावेशन के प्रयासों की सराहना और समर्थन करना भी नाबार्ड के कार्यों में शामिल है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों और सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर देना।
  • सहाकरी समितियों तथा ग्रामीण वित्तीय संस्थानों के कर्मचारियों में क्षमता निर्माण करना।
  • ग्रामीण क्षेत्र में अनुसन्धान और विकास तथा नवाचारों को प्रोत्साहित और समर्थन प्रदान करना भी नाबार्ड के कार्यों में शामिल है।         

 नाबार्ड की योजनाएँ

नाबार्ड यानिकी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा कृषि और ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करने के लिए अनेकों सरकार प्रायोजित योजनाएँ चलायी जा रही हैं। प्रमुख तौर पर इन योजनाओं की लिस्ट को दो भागों में बांटा जा सकता है।

1. कृषि क्षेत्र से सम्बंधित (Farm Sector)

  • डेयरी उद्यमिता विकास योजना।
  • आर्गेनिक और बायोलॉजिकल वाणिज्यिक उत्पादन इकाइयों के लिए पूंजी निवेश सब्सिडी योजना।
  • कृषि क्लिनिक तथा कृषि व्यवसाय केंद्र योजना।
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना।
  • जीएसएस – जारी की गई सब्सिडी का अंतिम उपयोग सुनिश्चित करना।
  • इंटरेस्ट सब्वेंशन स्कीम।
  • नई कृषि मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम। 

2. गैर कृषि क्षेत्र योजनाएँ

  • क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना ।
  • दीनदयाल अंत्योदय योजना – नेशनल रूरल लिवेलीहुड्स मिशन (Day – NRLM) ।
  • बुनकर पैकेज योजना।

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