संतोष सिंह की डेयरी फार्मिंग बिज़नेस में सफलता की कहानी |

Santosh D Singh इस सख्स के बारे में वार्तालाप करने से पहले यदि हम आपसे कहें की एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में लगभग 10 वर्षों तक काम कर चुके व्यक्ति ने अपने Business के रूप में डेयरी फार्मिंग को चुना | तो आपको अजीब लग सकता है | और आप अपने आप से सवाल कर सकते हैं की व्यक्ति ने जिस काम का उसे अनुभव था वह काम न चुन के, डेयरी फार्मिंग को ही क्यों चुना |

जी हाँ जिस शख्स की बात हम यहाँ पर कर रहे हैं, उनका नाम है संतोष डी सिंह | इन्होने मशहूर मल्टीनेशनल आईटी कंपनियों जैसे डैल, अमरीका ऑनलाइन इत्यादि में लगभग 10 वर्षों तक काम किया | और जब उन्होंने Business करने की ठानी, तो उन्होंने अपने बिज़नेस के रूप में चुना पशुपालन को |

संतोष डी सिंह का डेयरी फार्मिंग शुरू करने से पहले का जीवन

संतोष के मुताबिक बंगलौर से स्नातकोत्तर तक पढाई करने के बाद उन्होंने 10 वर्षो तक आईटी मल्टीनेशनल कंपनियों में काम किया | वह समय भारतवर्ष में आईटी क्षेत्र के लिए बहुत अच्छा समय था | इन्ही दिनों संतोष को कंपनी के कार्यो के कारणवश विदेश जाने का मौका मिला | और इसी यात्रा के दौरान संतोष को Kamai करने के विभिन्न स्रोतों के बारे में पता चला | और विदेश भ्रमण से वापस आने के बाद संतोष डेयरी फार्मिंग बिज़नेस करने का मन बना चुके थे | इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ने की बात अपने परिवार वालों को कही, और उसके बाद नौकरी छोड़ दी |

नौकरी छोड़ने के बाद वे अपने डेरी फार्म हेतु प्रोजेक्ट की अवधारणा करने के काम पर लग गए | चूँकि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, प्रोसेस इम्प्रूवमेंट,बिज़नेस इंटेलिजंस, एनालिटिक्स और रिसोर्स मैनेजमेंट विशेषज्ञता वाले कार्य हैं | लेकिन इन कामो को करने के लिए संतोष का प्राइवेट सेक्टर में बिताया गया 10 सालों का अनुभव काम आया | एयर कंडिशन्ड ऑफिस में बैठ के काम करने के आदी, संतोष के लिए डेयरी फार्म के  बिज़नेस का सफर बड़ी चुनौतियों से भरपूर होने वाला था |  

लेकिन इन्होने भी आने वाली चुनौतियों का पूरी शक्ति से सामना करने की ठान ली थी | इसलिए यह सब सोचकर उनके मन में रोमांच और उत्साह भर आता था | संतोष के अनुसार डेयरी फार्मिंग बिज़नेस सम्बन्धी उन्हें कोई अनुभव नहीं होने के कारण, उन्होंने नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टिट्यूट से फुल टाइम ट्रेनिंग ली | ट्रेनिंग के दौरान ही संतोष को डेरी फार्म को नजदीकी से जानने और इस बिज़नेस की बारीकियां सिखने का मौका मिला, वही उन्होंने पशुओं की देखरेख करना भी सीखा |

ट्रेनिंग और डेयरी फार्म का नजदीकी अनुभव भी उनके अनुकूल ही रहा, मतलब की जैसा इन्होने सोचा था वैसा ही रहा, यही कारण था की उनका विश्वास इस बिज़नेस के प्रति और मजबूत हो गया |  भारतीय कृषि की अप्रत्याशित दुनिया में डेयरी फार्म एक स्थायी और लाभकारी बिज़नेस है, यही कारण है की संतोष ने डेरी फार्मिंग बिज़नेस में जाने का निर्णय लिया |

Dairy Farm Business ki Starting:

Santosh D Singh ने अपने डेयरी फार्म business की starting तीन गायों से की, और इनकी शेडिंग उन्होंने उनके पास उपलब्ध तीन एकड़ जमीन में कराई थी | जिस जमीन का उपयोग वो अपने नौकरीपेशा जीवन में शहरी शोर शराबे से बचने हेतु किया करते थे | संतोष ने पहली बार अपने डेयरी फार्म में दूध का उत्पादन आज से तीन साल पहले किया था |

तब वे खुद गायों के खाने का, पीने का, नहाने का और उनकी शेडिंग की सफाई का ध्यान रखा करते थे | उसके बाद इनके द्वारा डेयरी फार्म की मूल संगरचना की कल्पना की गई | और 20 दुधारू गायों को पहले ही साल में अपने डेयरी फार्म का हिस्सा बनाने हेतु, उनके लिए Infrastructure तैयार किया गया |

Santosh D Singh के अनुसार National Dairy Research Institute (NDRI) से एक ट्रेनर जिन्होंने संतोष को ट्रेनिंग दी थी, ने उनके फार्म का विजिट किया और उनको NABARD से Technological मदद लेने की सलाह दी | जब Santosh D Singh ने नाबार्ड से बातचीत की, तो उन्हें एहसास हुआ की उन्हें कम से कम  100 पशुओं के लिए डेयरी फार्म स्थापित करना चाहिए |

जिसमे प्रोजेक्ट रिपोर्ट के माध्यम से   100 पशुओं की दूध देने की उत्पादकता को प्रतिदिन 1500 ltrs आँका गया | और इनसे होने वाली सालाना Kamai को एक करोड़ आँका गया | पिछले पांच सालों से डेरी उत्पादों की कीमत में साल दर साल हो रही वृद्धि यह इशारा करती है की इस बिज़नेस में अच्छा मार्जिन है | Santosh D Singh का विश्वास तब और मजबूत हो गया जब नाबार्ड ने उनको डेयरी फार्म business में प्रवेश करने हेतु सिल्वर मैडल से नवाजा |

उसके बाद उनके प्रोजेक्ट प्लान को State Bank of Mysore ने फ़ण्डिंग करी, और संतोष ने 100 गायों के लिए Infrastructure तैयार किया |

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सूखे जैसी समस्या का निबटान

संतोष के अनुसार जिस समस्या को मद्देनज़र रखते हुए, वे उस समस्या से निकलने के बारे में कुछ सोच ही रहे थे | की वह समस्या उनके सामने आ पड़ी थी | समस्या यह थी की बेमौसम बरसात के कारण सूखा पड चूका था | और सूखा पड़ने के कारण जानवरों के लिए हरे चारे की भारी कमी हो गई थी | यह सूखा लगभग 18 महीने तक चला था | और इस वजह से हरे चारे की लगत में दस गुना वृद्धि हो गई थी | जो अप्रत्याशित थी | और इसका असर दूध के उत्पादन पर भी पड़ा था |

इन सूखे के दिनों में इन्होने अपना डेयरी फार्म business को जारी रखने के लिए अपनी बचत में से पैसो का इस्तेमाल किया | और इस समस्या का कोई स्थायी समाधान खोजने की ठानी | फिर उन्होंने निर्णय लिया की वे Hydroponics इकाई लगाएंगे, जो उन्हें नियंत्रित वातावरण में एक दिन में एक टन हरा चारा उत्पादन करने में सहायता प्रदान करेगा | और यह चारा व्यवसायिक तौर पर ख़रीदे जाने वाले हरे चारे से काफी सस्ता पड़ेगा |

Hydroponics से चारे का उत्पादन करके चारे की लागत में कमी आई है | और जानवरों की उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोत्तरी हुई है | Santosh D Singh के अनुसार वे अपने डेयरी फार्म बिज़नेस (Amrutha Farm) को अगले स्तर  पर ले जाने हेतु, और विकल्पों की तलाश में कार्यरत हैं |

Santosh D Singh की इस story से वो लोग Inspiration एवं सीख ले सकते हैं, जो डेयरी फार्म बिज़नेस को अपने भविष्य के कैरियर के रूप में देख रहे हों |

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