फार्मेसी बिज़नेस या मेडिकल स्टोर कैसे खोलें। Steps to Start Pharmacy Business.

इंडिया में Pharmacy Business अर्थात Medical Shop किफायती और सदाबहार business है | क्योकि देश की अर्थव्यवस्था में ऊंच नीच का इस business पर कुछ ज्यादा प्रभाव पड़ता नहीं है | वह इसलिए की दवाई या Medicine का सीधा लेना देना मनुष्य के स्वास्थ से होता है | आदमी भले ही अपनी अन्य आवश्यकताओं में समय के अनुरूप कटौती कर सकता है | किन्तु मेडिकल के मामले में नहीं | यही कारण है की Medical Shop business में मंदी के दिनों में भी Kamai करने के सारे अवसर उपलब्ध रहते हैं |

चूँकि इसमें अधिक खर्चा ना आने के कारण और India के हर क्षेत्र में दवाइयों की मांग अधिक होने के कारण युवाओं में यह business अधिक प्रचलित है | इसलिए आज हम बात करेंगे की यदि इंडिया में किसी व्यक्ति को अपनी फार्मेसी शुरू करनी हो तो, उसे क्या क्या और किस प्रकार की गतिविधियाँ (Steps) करने पड़ेंगे |

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मेडिकल स्टोर के लिए कोर्स (Complete Pharmacy Course)

यदि आप अपना मेडिकल स्टोर शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आप यही जानने को इच्छुक होंगे की इसके लिए कौन सा कोर्स करना पड़ता है। हालांकि यह भी सत्य है की आप किसी पंजीकृत फार्मासिस्ट को नियुक्त करके भी इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं। लेकिन यदि आप बिना किसी को नियुक्त किये मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं, तो फिर आपको स्वयं को एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट बनने की प्रक्रिया को पूर्ण करना होगा।

वर्तमान में फार्मेसी शिक्षा के लिए भी सभी प्रकार के कोर्स जैसे डिप्लोमा, डिग्री और मास्टर डिग्री विद्यमान हैं। इनमें से मुख्य दो कोर्स जिन्हें कोई इच्छुक विद्यार्थी इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करके कर सकता है उनकी डिटेल्स निम्न है।

डिप्लोमा इन फार्मेसी (D. Pharma) :

ऐसे लोग जो बाद में अपना मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं वे आम तौर पर इसी दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स का चयन बारहवीं के बाद करते हैं। लेकिन ध्यान रहे डी फार्मा कोर्स में प्रवेश के लिए विद्यार्थी का विज्ञान संकाय के PCM या PCB विषयों से पास होना अनिवार्य है। कला संकाय से जुड़े विद्यार्थी इस कोर्स में प्रवेश के लिए पात्र नहीं है।

यह दो सालों का कोर्स होता है, और आम तौर पर यह सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों द्वारा भी ऑफर किया जाता है। सरकारी कॉलेज में प्राइवेट कॉलेज के मुकाबले फीस बेहद कम होती है, और डी फार्मा में प्रवेश के लिए एक एंट्रेंस एग्जाम आयोजित कराया जाता है। जिसमें प्राप्त रैंक के अनुसार ही सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।

कहने का आशय यह है की यदि आप भविष्य में अपना Pharmacy Business शुरू करने के बारे में विचार कर रहे हैं, तो इसकी तैयारी आप अपने विद्यार्थी जीवन से ही कर सकते हैं। इसके लिए आपको दसवीं पास करके विज्ञान संकाय का चुनाव करना होगा और उसे PCB या PCM विषयों के साथ उत्तीर्ण करना होगा। उसके बाद एंट्रेंस एग्जाम देना होगा, और काउंसलिंग के जरिये अपने पसंदीदा कॉलेज का चयन करना होगा।

दो वर्षों का पाठ्यक्रम पूर्ण कर लेने के बाद विद्यार्थी को 500 घंटों की या तीन महीनों की ट्रेनिंग किसी रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के तहत करनी होती है। आम तौर पर सरकारी अस्पतालों और चिकित्सालयों में कार्यरत पंजीकृत फार्मासिस्टो के अधीन ही यह प्रशिक्षण लिया जाता है ।

इसलिए जब आपके डी फार्मा फाइनल इयर के एग्जाम ख़त्म हो जाते हैं, तो कॉलेज द्वारा आपको कुछ डाक्यूमेंट्स प्रदान किये जाते हैं। जिनकी मदद से आप जिले के CMO Office में जाकर प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। CMO Office द्वारा जहाँ आप ट्रेनिंग प्रदान करना चाहते हैं वहां पर नियुक्त रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट को संबोधित करते हुए, एक लैटर जारी किया जाता है।

और जब आप तीन महीनों या 500 घंटों की ट्रेनिंग पूरी कर लेते हैं, तो उसके बाद ही आप फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया में एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं। और यह तो आप सब अच्छी तरह जानते हैं की एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट आसानी से अपना Pharmacy Business स्थापित कर सकता है।      

बैचलर इन फार्मेसी (B. Pharma)

दूसरा कोर्स जो आप बारहवीं के बाद कर सकते हैं, वह है बी. फार्मा । इस कोर्स में प्रवेश करने के लिए भी आपको विज्ञान संकाय के PCM या PCB विषयों के साथ बारहवीं उत्तीर्ण करनी होती है। बारहवीं के बाद बी फार्मा चार सालों का एक डिग्री कोर्स होता है। लेकिन ऐसे विद्य्राठी जिन्होंने डी फार्मा किया हो वे इसके दुसरे वर्ष में सीधे प्रवेश पा सकते हैं। इसलिए ऐसे विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम 3 वर्षों का हो जाता है।

इस पाठ्यक्रम को भी कई सरकारी और निजी कॉलेज द्वारा ऑफर किया जा रहा है, लेकिन इसमें प्रवेश देने के लिए भी एंट्रेंस एग्जाम आयोजित किया जाता है, और उसमें आई रैंक के आधार पर ही कॉलेजों में एडमिशन भी मिलता है।

फार्मेसी बिजनेस का पंजीकरण (Registration of Pharmacy Business)

इंडिया में Pharmacy business या अपनी Medical Shop खोलने के लिए business registration दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्टेप है | इस बिज़नेस के Registration Process को निम्न चार भागों में विभाजित किया जा सकता है |

1. हस्पताल फार्मेसी (Hospital Pharmacy):

Hospital Pharmacy से हमारा आशय उस Medical shop से है | जो किसी हॉस्पिटल के अंदर होती है | और हॉस्पिटल के मरीजों के आवश्यकतानुसार, उन्हें दवाइयों की बिक्री करता है |

2. नगरीय फार्मेसी (Township Pharmacy):

Township Pharmacy के अंतर्गत वह व्यक्ति अपने Business को Register कराता है |  जो किसी बस्ती में अपनी Medical Shop खोलना चाहता है | और बस्ती में निवासित लोगों की दवाई सम्बन्धी आवश्यकताओं को पूर्ण करना चाहता है |

3. श्रृंखला फार्मेसी (Chain Pharmacy) :

Chain Pharmacy का मतलब उस Medical shop से होता है | जिसका स्टोर किसी एक जगह न होकर विभिन्न शहरों, इलाकों में फैला होता है | जैसे अप्पोलो फार्मेसी इत्यादि |

4. व्यक्तिगत फार्मेसी (Stand Alone Pharmacy):

Stand alone pharmacy के अंतरगत उन व्यक्तियों के business को register किया जाता है |  जो रिहायशी इलाकों में Medical shop खोलना चाहते हैं | गली मोहल्लों में स्थापित अधिकतर मेडिकल की दुकानें इसी श्रेणी के अंतर्गत register होते हैं |

कर पंजीकरण (Tax Registration):

Pharmacy Business के लिए India के किसी भी राज्य में Value added tax (VAT) के अंतर्गत Tax Registration करा सकते हैं | चूँकि VAT नामक tax राज्य सरकार के अधीन आता है | इसलिए अपने बिज़नेस का VAT Registration करने के लिए राज्य के VAT या Sales Tax department से संपर्क किया जा सकता है |

ड्रग लाइसेंस (Get drug license for your pharmacy)

खुद का फार्मेसी बिजनेस शुरू करने के लिए drug license लेना सबसे महत्वपूर्ण स्टेप है | अगर हम यह कहें तो गलत न होगा की इस business को start करने की चाबी ही drug license है | और यह license केंद्रीय और राज्य स्तरीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा जारी किया जाता है | जारी किये जाने वाले लाइसेंस दो प्रकार के होते हैं |  Retail drug license (RDL) और Wholesale drug license (WDL) | दवाइयों के फुटकर विक्रेताओं को RDL License और थोक विक्रेताओं को WDL License जारी किया जाता है | 

और यह लाइसेंस उन व्यक्तियों के नाम से जारी किया जाता है | जिन्होंने Pharmacy में कोई डिग्री या डिप्लोमा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ली हों | मान्यता प्राप्त संस्थान की लिस्ट फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया की अधिकारिक वेबसाइट की Approved College Section पर देखी जा सकती है| अगर हम नैतिकता की बात करें, तो इंडिया में केवल वही व्यक्ति मेडिकल स्टोर अर्थात फार्मेसी शुरू कर सकता है |

जिसने फार्मेसी में डिग्री या डिप्लोमा ली हों | लेकिन वास्तविक भारत में ऐसा होता नहीं है | यदि किसी के रिस्तेदार ने, या फिर जानकार ने यह कोर्स किया होता है, तो वह अपने नाम से लाइसेंस लेकर पैसों के बदले या फिर भलाई हेतु किसी और को दे देता है |

फार्मेसी बिजनेस खोलने के लिए दिशानिर्देश (Guideline to start pharmacy in India) :

  • यदि कोई व्यक्ति मेडिकल शॉप खोलना चाहता हो तो उसके पास कम से कम 10 स्क्वायर मीटर जगह होनी चाहिए | जबकि यदि वह फूटकर और थोक दोनों के माध्यम से दवाइयां बेचना चाहता हो तो जगह कम से कम 15 स्क्वायर मीटर होनी चाहिए |
  • Medical Shop में एक Store होना चाहिए, और स्टोर में रेफ्रीजिरेटर, एयर कंडीशनर इत्यादि सामान अवश्य होने चाहिए | क्योकि बहुत सारी दवाइयां, इंजेक्शन, इन्सुलिन इत्यादि ऐसे होते हैं | जिन्हे फ्रिज में रखना जरुरी होता है |
  • किसी Certified Pharmacist के सम्मुख ही थोक में दवाइयां बेचीं जा सकती हैं | या इसके अलावा वह व्यक्ति जो Graduate हो, और उसे कम से कम दवाइयों के क्षेत्र में एक साल का अनुभव हो |
  • फूटकर में दवाइयां बेचते समय भी Certified Pharmacist का होना जरुरी है | कार्यशील घंटो में फार्मासिस्ट का मेडिकल की दुकान पर उपलब्ध होना जरुरी है |

Drug Licence ke liye documents:

  • आवेदन पत्र
  • आवेदक का नाम, पद और हस्ताक्षर किया हुआ कवर लेटर |
  • ड्रग लाइसेंस हेतु फीस जमा किया हुआ चालान |
  • बिज़नेस प्लान की कॉपी
  • जगह पर मालिकाना अधिकार का आधार |
  • यदि जगह किराए में है तो स्वमितव का प्रमाण पत्र |
  • रजिस्टरड फार्मासिस्ट का शपथ पत्र |
  • यदि कोई फार्मासिस्ट नौकरी पर रखा हुआ है | तो नियुक्ति पत्र |

चूँकि Pharmacy business करने हेतु drug license लेने के लिए एक विशेष प्रकार की योग्यता चाहिए होती है | इसलिए इंडिया में अक्सर लोग करते क्या हैं की अपने सगे संबंधियों, या जान पहचान में से कोई ऐसा व्यक्ति ढूंढते हैं | जिसने Pharmacy क्षेत्र में डिग्री या डिप्लोमा ली हों | फिर उसके नाम से license लेकर मेडिकल स्टोर चलाते हैं |

जो की व्यावहारिक दृष्टिकोण के हिसाब से तब सही है, जब व्यक्ति को Pharmacy sector का कोई अनुभव हो | लेकिन degree या डिप्लोमा न होने से वह अपना बिज़नेस स्टार्ट नहीं कर पा रहा हो | यदि नैतिकता की बात करें तो नैतिकता के दृष्टिकोण से तो यह गलत ही है | और इस स्तिथि पर हमारा दृष्टिकोण यह है की व्यक्ति चाहे किसी के नाम से लाइसेंस ले |

लेकिन उसको दवाइयों की जानकारी तो होनी ही होनी चाहिए | वरना कभी कभी हो सकता है की उसको अपने ग्राहकों के सामने शर्मिंदा होना पड़े | जो उसके बिजनेस के लिए बिलकुल ठीक नहीं होगा |

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