इंडिया में पैथोलॉजी लैब कैसे शुरू करें? How to start a pathology lab in India Hindi.

वर्तमान में Pathology Lab की महत्वता पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है शायद इसका मुख्य कारण यह है की मिलावटी खान पान एवं आरामदायक जीवनशैली होने के कारण लोग पहले के मुकाबले ज्यादा बीमार होने लगे हैं | हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं की मेडिकल साइंस ने बीतते वक्त के साथ काफी तरक्की की है, इसलिए बीमारी से होने वाली मृत्यु दर को घटाने में तो मेडिकल साइंस थोड़ा बहुत कामयाब रहा है लेकिन वर्तमान खानपान एवं विलासिता पूर्ण जीवन शैली के चलते लोगों का बीमार पड़ने की संख्या में काफी तीव्र वृद्धि हुई है | और जहाँ पहले चिकित्सकों की कोशिश बीमारीयों को बिना जांच के ठीक करने की होती थी, इसलिए वे अपना पूरा अनुभव उसे ठीक करने के लिए लगा देते थे | लेकिन वर्तमान ईलाज प्रणाली का परिदृश्य बदल चूका है वर्तमान में डॉक्टर द्वारा जांच पहले कराई जाती है उसके बाद ईलाज शुरू किया जाता है | इसलिए वर्तमान में हर कोने में जहाँ भी मनुष्य प्राणी निवासित है में Pathology Lab की नितांत आवश्यकता है | यह बिज़नेस भी स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ बिज़नेस है इसलिए यदि Pathology lab अच्छी लोकेशन पर स्थित हुई तो वह उद्यमी की अच्छी खासी कमाई करवा पाने में सक्षम हो पायेगी |

pathology lab

पैथोलॉजी लैब क्या है (What is pathology lab in Hindi):

पैथोलॉजी का अर्थ समझने से पहले हमें यह समझ लेना जरुरी है की एक Pathology Lab में मरीज के खून, मूत्र, ऊतकों, कोशिकाओं इत्यादि का अध्यन करके यह पता लगाया जाता है की रोगी को जो समस्या हो रही है वह किस रोग की वजह से हो रही है |  सामान्य बोलचाल की भाषा में भी पैथोलॉजी का अर्थ रोग के अध्यन करने से ही लगाया जाता है | इन अध्यनों का आधार अब तक हुए चिकित्सा अनुसन्धान, जैव विज्ञानं अनुसन्धान के परिणामों को माना जाता है और उसी के आधार पर चिकित्सक द्वारा रोगी का ईलाज शुरू किया जाता है | कहने का अभिप्राय यह है की किसी Pathology Lab का रुख हम अपने शरीर में उत्पन्न समस्या का कारण अर्थात निदान ढूंढने के लिए करते हैं | और एक  Pathology Lab की रिपोर्ट के आधार पर ही चिकित्सक रोगी के रोग को पहचानता है एवं उसका ईलाज शुरू करता है | इसके अलावा एक पैथोलॉजी लैब में रिसर्च समबन्धी कार्यों को भी पैथोलोजिस्ट द्वारा अंजाम दिया जाता है |

पैथोलॉजी लैब के विभाग (Some Specific Departments of Pathology Lab)

एक Pathology Lab का काम केवल शरीर से निकलने वाले तरल जैसे खून एवं मूत्र की जांच करना नहीं होता है बल्कि इसके कई विशेष कार्य क्षेत्र के आधार पर विभाग होते हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन कुछ इस प्रकार से है |

Hematology: इस जांच क्षेत्र में खून की कोशिकाओं की जांच करके रोगों का पता लगाया जाता है | कहने का आशय यह है की ऐसे रोग जिनका पता खून की जांच करके लगाया जा सकता है वे Pathology Lab की इस जाँच क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं |

Immunology: इस प्रकार का यह टेस्ट ऐसे मरीज से कराया जा सकता है जिसे इम्यून सम्बन्धी विकार जैसे एलर्जी, ऑटोम्यून्यून विकार हो |

Histopathology: यह जांच क्षेत्र ऊतकोंकी जांच से सम्बंधित है जिसे बायोप्सी प्रक्रिया के तहत शरीर से निकाला जाता है और Pathology Lab में जांच के लिए भेजा जाता है | उदाहरणार्थ:यदि किसी दांत के सर्जन को लगता है की मरीज को मुहं का कैंसर हो सकता है तो वह उसके गाल के ऊतक का एक टुकड़ा ऐसी लैब में जांच के लिए भेज सकता है जो यह पता करेगी की कैंसर है या नहीं |

Cytology:एक साइटोलॉजिस्ट का काम व्यक्तिगत कोशिकाओं का परीक्षण करने का होता है | जिसमे वह किसी ऐसे व्यक्ति की कोशिकाओं का परीक्षण कर रहा होता है जिसे सूजन या कोई घाव हो और चिकित्सक को उसमे कैंसर होने का अंदेशा हो |

Medical microbiology: इस जांच क्षेत्र में यह पता लगाने की कोशिश की जाती है की इन्फेक्शन किस तरह का है कोई वायरल इन्फेक्शन है या फिर बैक्टीरियल |

Forensic pathology: पैथोलॉजी लैब के इस जांच क्षेत्र या विभाग में मृत व्यक्तियों की ऑटोप्सी की जाती है और उनके ऊतकों का अध्यन करके मृत्यु के कारणों का पता लगाया जाता है |

Molecular pathology: Pathology Lab के इस विभाग में DNA एवं RNA जैसे टेस्ट को आनुवंशिक दोष या बीमारी का निर्धारण करने के लिए किया जाता है |

Clinical Chemistry: इस जांच क्षेत्र में आने वाले मेडिकल टेस्ट की बात करें तो कोलेस्ट्रोल टेस्ट, ग्लूकोज़ टेस्ट इत्यादि इसके उदहारण हैं | चिकित्सक को किसी मधुमेह रोगी का ईलाज करते वक्त यह पता लगाना आवश्यक हो जाता है की रोगी की सुगर लेवल क्या है जिससे चिकित्सक दी जाने वाली इन्सुलिन की मात्रा का निर्धारण कर सके |

पैथोलॉजी लैब कैसे शुरू करें (How to open pathology lab in Hindi):

Pathology Lab शुरू करने से सम्बंधित अक्सर लोग अनेकों प्रश्न पूछते हैं इनमे एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न यह है की क्या एक लैब तकनीशियन अर्थात DMLT (Diploma in Medical Laboratory Technology) या MLT किया हुआ व्यक्ति खुद की Pathology Lab खोल सकता है? इसका साधारण सा जवाब है की हाँ DMLT या MLT किया हुआ ही व्यक्ति क्यों बल्कि हर वो व्यक्ति जो इस बिज़नेस में आने वाली लागत को वहन करने को तैयार है वह यह Pathology Lab business शुरू कर सकता है, लेकिन उसे अपनी लैब में कम से एक Pathologist को नियुक्त करना होगा क्योंकि वर्तमान नियम के मुताबिक सिर्फ एक प्रमाणित Pathologist ही रिपोर्ट में हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत होगा न की लैब तकनीशियन | इसका अर्थ यह हुआ की यदि कोई DMLT या MLT किया हुआ व्यक्ति भी अपनी खुद की Pathology Lab शुरू करना चाहता है तो उसे भी कम से कम एक Pathologist को अपनी लैब में नियुक्त करना होगा | तो आइये जानते हैं कैसे कोई समर्थ व्यक्ति अपना इस प्रकार का बिज़नेस शुरू कर सकता है |

  1. बिज़नेस की योजना बनायें:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की अकेले के दम पर इस Pathology Lab business को सिर्फ एक पैथोलोजिस्ट ही शुरू कर सकता है | इसलिए अन्य जो भी व्यक्ति इस बिज़नेस को शुरू करना चाहते हैं उन्हें कम से कम एक पैथोलोजिस्ट की नियुक्ति तो करनी ही होती है | इसलिए इस बिज़नेस को शुरू करने से पहले उद्यमी को बिज़नेस प्लान बनाना होता है जिसमे यह भी उल्लेख होता है की वह पैथोलोजिस्ट का प्रबंध कहाँ से करेगा और उसके अलावा अन्य कितने लोगों को काम पर रखेगा | और अपने Pathology Lab के माध्यम से मरीजों को कौन कौन सी फैसिलिटी मुहैया कराएगा | चूँकि जगह, कर्मचारी, उपकरण इत्यादि को मिलाकर एक साधारण सी Pathology Lab खोलने में 15-20 लाख का खर्चा आ सकता है और यदि उद्यमी इसमें अन्य फैसिलिटी भी ग्राहकों को उपलब्ध कराता है तो यह खर्चा 80 लाख तक का आंकड़ा पार कर सकता है | इसलिए उद्यमी को यह भी प्लान करना होता है की वह इन सब खर्चों का प्रबंध कैसे करेगा, और उसके द्वारा लगी लागत की पूर्ति वह कितने समय बाद कर पायेगा | हालांकि वास्तविक कमाई का पता तो बिज़नेस चलाने के बाद ही पता चल पाता है लेकिन बिज़नेस प्लान में उद्यमी को मिनिमम सेल को ध्यान में रखकर अनुमानित कमाई भरनी पड़ती है | Pathology Lab business की योजना बनाते वक्त उद्यमी को इस बात का भी ध्यान रखना होता है की वह कौन कौन सी सर्विस जैसे Hematology, Biochemistry, Clinical Pathology, Serology, Cytopathology, Histopathology इत्यादि में से अपने ग्राहकों को देना चाहता है | इस बात का निर्णय लेने के बाद ही इस बिज़नेस को शुरू करने में इस्तेमाल में लाये जाने वाले मशीनरी, उपकरणों, कर्मचारियों के वेतन इत्यादि पर होने वाले अनुमानित खर्चे से उद्यमी अवगत हो पायेगा | जानिए एक प्रभावी बिज़नेस प्लान कैसे बनायें?

  1. लोकेशन का चुनाव:

Pathology Lab की सफलता असफलता के पीछे लोकेशन की बेहद बड़ी भूमिका होती है इसलिए उद्यमी को ऐसी लोकेशन पर जहाँ अस्पतालों एवं डॉक्टर के क्लिनिक की संख्या अधिक हो पर अपनी Pathology lab स्थापित करनी चाहिए | ताकि उद्यमी अपने उद्यम को उस एरिया में स्थित डॉक्टरों से संपर्क करके प्रमोट कर सके और डॉक्टर मरीजों को परीक्षण कराने उसी के लैब पर भेजें इसके लिए भी वह डॉक्टरों से कमीशन इत्यादि की बात कर सके | अस्पताल या डॉक्टर के क्लिनिक के नज़दीक लैब होने का यह भी फायदा होता है की यहाँ पर मरीज बिना किसी के बताये भी आ सकते हैं | जानिए बिज़नेस के लिए लोकेशन का चुनाव कैसे करें?

  1. चयनित लोकेशन पर लैब का निर्माण:

अब यदि उद्यमी ने अपने Pathology Lab business  के लिए लोकेशन का चुनाव कर लिया हो तो उद्यमी को उस चयनित लोकेशन पर किराये पर जगह लेकर लैब का निर्माण करने का होना चाहिए | छोटे स्तर पर लैब का निर्माण करने के लिए उद्यमी को 200-250 square feet जगह की आवश्यकता हो सकती है | इसमें भी उद्यमी को इस जगह को अनेक भागों जैसे ग्राहकों का Waiting Area, Test room, Report Generated room, स्टोर, वेस्ट डिस्पोजल रूम इत्यादि में विभक्त करना होता है |

  1. लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन:

लैब का निर्माण कर लेने के बाद अब उद्यमी का अगला कदम अपने बिज़नेस को क़ानूनी स्वरूप प्रदान करने का होना चाहिए | उद्यमी चाहे तो शुरुआत में अपने बिज़नेस को Proprietorship इकाई के तौर पर रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के साथ रजिस्टर कर सकता है | इसके अलावा उद्यमी को अपनी Pathology Lab को स्थानीय नियमों के मुताबिक भी रजिस्टर करना पड़ता है जो अलग अलग राज्यों में अलग अलग हो सकते हैं | इस बिज़नेस को शॉप्स एंड एस्टाब्लिश्मेंट एक्ट एवं क्लिनिकल एस्टाब्लिश्मेंट एक्ट के तहत रजिस्टर कराना भी आवश्यक होता है | इसके अलावा इस तरह का बिज़नेस शुरू करने के लिए राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक (Director of Health Services) और स्थानीय जैव चिकित्सा अपशिष्ट निपटान इकाई (Local Biomedical Waste disposal Body.)इत्यादि में भी इसे पंजीकृत करने की आवश्यकता हो सकती है | राज्य के प्रदूषण नियंत्रण विभाग से स्वीकृति,नगरपालिका, नगर परिषद् इत्यादि से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट इत्यादि की भी आवश्यकता हो सकती है | इसके अलावा उद्यमी चाहे तो गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अपनी Pathology Lab को National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories (NABL) से मान्यता दिला सकता है | कुछ लाइसेंस एवं पंजीकरण ऐसे भी होते हैं जो लैब में उपयोग होने वाले मेडिकल मशीनरी एवं उपकरणों को ध्यान में रखते हुए कराने पड़ते हैं |

  1. कर्मचारियों की नियुक्ति:

यदि आप खुद ही MD Pathologist/ MD Microbiologist इत्यादि हैं जो रिपोर्ट में हस्ताक्षर करने के अधिकृत माने जाते हैं तो आप खुद अकेले या अपने बिज़नेस प्लान के मुताबिक लैब तकनीशियन इत्यादि की नियुक्ति करके इस बिज़नेस को सफलतापूर्वक आसानी से चला सकते हैं |लेकिन यदि आप Clinical establishment act में दर्शाए गए नियमों के मुताबिक अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनने के लिए पात्र नहीं है तो आपको कम से कम एक पैथोलोजिस्ट फुल टाइम या पार्ट टाइम रखना ही होगा | हालांकि Pathology Lab Business एक ऐसा बिज़नेस है जिसमें गलती की कहीं कोई जगह नहीं है इसलिए स्टाफ की नियुक्ति के बाद भी इन्हें लगातार इस बात का प्रशिक्षण दिया जाता रहता है की कैसे वे बिना गलती किये हुए अपने काम को अंजाम तक पहुंचा सकते हैं |

  1. उपकरण एवं दैनिक इस्तेमाल की सामग्री:

हालांकि Pathology Lab द्वारा दी जाने वाली सर्विस के मुताबिक इस्तेमाल में लाये जाने वाले उपकरण एवं सामग्री की आवश्यकता अलग अलग हो सकती है | लेकिन एक साधारण सी लैब में भी hematology analyser, biochemistry analyser, गुणवत्ता को नियंत्रित करने वाले उपकरण, विश्लेषण इत्यादि के लिए अभिकर्मक, ब्लड सैंपल लेने के उपयोग में लाये जाने वाले उपकरण, रेफ्रीजरेटर, सेंट्रीफ्यूज, इनक्यूबेटर, पतली नलिकाएं, आटोक्लेव, कंप्यूटर, प्रिंटर , स्टेशनरी इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है | माइक्रोबायोलॉजी और हिस्टोपैथोलॉजी जैसे अनुभागों को विशेष उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है । हालांकि कुछ Pathology Lab द्वारा अपने ग्राहकों को इस तरह की सर्विसेज किसी अन्य बड़ी लैब से टाई अप करने के बाद ऑफर की जाती हैं | ध्यान रहे चूँकि एक लैब में स्थित उपकरणों का इस्तेमाल बीमारी की जांच के लिए किया जाता है इसलिए इन सभी उपकरणों का नियमित समय पर रखरखाव होना जरुरी है | दैनिक प्रक्रिया में उपयोग में लाये जाने वाले उपभोग्य एवं अभिकर्मकों की खरीदारी के लिए उद्यमी को सबसे पहले विभिन्न विक्रेताओं से कोटेशन मंगा लेनी चाहिये | उसके बाद उनकी कीमतों, गुणवत्ता इत्यादि की तुलना करने के बाद ही विक्रेता का चुनाव करना चाहिए |

अब उद्यमी अपनी Pathology lab business शुरू करने के लिए लगभग सभी जरुरी कदम उठा चूका है, इसलिए उद्यमी चाहे तो इनवॉइस मैनेजमेंट इत्यादि के लिए कोई एकाउंटिंग सॉफ्टवेर  खरीद सकता है | जो बिक्री होने पर बिल तो जनरेट करेगा ही साथ में उसका प्रिंट निकालने का विकल्प, पुराने बिल को ढूंढने का विकल्प इत्यादि भी मुहैया कराएगा |

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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