तहसीलदार कैसे बनें । How to Become a Tehsildar in India.

Tehsildar या Talukdar नामक इस शब्द से शायद आप सभी अच्छी तरह से अवगत होंगे क्योंकि इसका भारतीय शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है । जैसा की हम सबको विदित है की हमारा देश भारतवर्ष 1947 को ही आजाद हुआ था । इससे पहले यहाँ ब्रिटिश हुकूमत काबिज थी और उस ब्रिटिश हुकूमत के दौरान भी Tehsildar या तालुकदार हुआ करते थे। जो एक राजस्व अधिकारी के तौर पर नियुक्त होते थे और इनका कार्य राजस्व जुटाना था । आज भी हमारा देश भारतवर्ष अनेकों राज्यों से मिलकर बना है और राज्य अनेकों जिलों से मिलकर बने होते हैं। और जिलों की यदि हम बात करें तो ये अनेकों तहसील से मिलकर बने होते हैं। जिस प्रकार एक जिले का मुख्य कार्यकारी आधिकारी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट होता है ठीक उसी प्रकार एक तहसील का मुख्य कार्यकारी अधिकारी तहसीलदार होता है। यद्यपि एक तहसीलदार का मुख्य कर्तव्य तहसील राजस्व एजेंसी के प्रभारी के तौर पर कार्य करना होता है । इसमें उस तहसील से प्राप्त हुआ राजस्व का रिकॉर्ड रखना एवं राजस्व खातों की उचित तैयारी एवं रखरखाव करना शामिल है। आम तौर पर एक Tehsildar कानूनगो एवं पटवारी के कार्यों की निगरानी करता है। यही कारण है की तहसीलदार को संविधान/सरकार द्वारा अनेकों शक्तियाँ प्रदान होती हैं जिनका उपयोग वह अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए करता है। और आये दिनों जब लोगों का कोई भी कार्य तहसील में पड़ता है तो वे तहसीलदार की पद प्रतिष्ठा को देखकर यह जानने को उत्सुक रहते हैं की आखिर Tehsildar बनते कैसे होंगे?। आज इस लेख के माध्यम से हम लोगों के इसी प्रश्न का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। तो आइये सबसे पहले यही जान लेते हैं की तहसीलदार होते कौन हैं? ।

Tehsildar-kaise-bane

तहसीलदार कौन होते हैं (Who are Tehsildar):

Tehsildar की यदि हम बात करें तो भारत में ये जिले के प्रशासकीय ढाँचे का एक अहम् हिस्सा होते हैं इनका मुख्य कार्य तहसील राजस्व एजेंसी के प्रभारी के तौर पर कार्य करने का होता है। एक तहसीलदार को हम किसी तहसील का मुख्य राजस्व प्रभारी भी कह सकते हैं। भारत के विभिन्न राज्यों में एक तहसीलदार को तालुकदार भी कहा जाता है। एक जानकारी के मुताबिक तहसील नामक इस शब्द को मुगल लेकर आये थे इसलिए कहा यह जाता है की यह एक इस्लामी शब्द है जिसका अरबी में अर्थ ‘’ राजस्व संग्रह’’ होता है। यानिकी एक ऐसा व्यक्ति जो तहसील के राजस्व सम्बन्धी कार्यों का प्रभारी होता है उसे ही तहसीलदार कहा जाता है। और तहसीलदार की अनुपस्थिति या ठीक नीचे काम करने वाले व्यक्ति को नायब तहसीलदार या फिर उप तहसीलदार के रूप में भी जाना जाता है।

तहसीलदार के कार्य (Duties responsibility of Tehsildar):

तहसीलदार जिले की प्रशासकीय व्यवस्था में एक प्रमुख राजस्व प्रभारी होता है इसलिए तहसीलदार के अधिकतर कार्य राजस्व से सम्बंधित ही होते हैं। कुछ कार्यों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • तहसीलदार का कर्तव्य तहसील से सम्बंधित विभिन्न राजस्व जैसे भूमि राजस्व, नहर राजस्व, उपकर एवं अन्य सरकारी देय राशि को एकत्रित करने का होता है।
  • तहसीलदार का कार्य यह देखने का भी होता है की जमाबंदी का राजस्व एवं गाँव सभा के आसामियों की जमाबंदी सही समय पर सही ढंग से तैयार हो रही हो।
  • असेसमेंट सम्बन्धी कार्य के अलावा जहाँ भी आवश्यक हो भू राजस्व को पुन: लगाना, या उसकी पुन: संरचना करना इत्यादि भी तहसीलदार के कार्य की लिस्ट में शामिल है।
  • जहाँ भी कानूनी रूप से आवश्यक हो गाँव सभा या राज्य सरकार से सम्बंधित मुकदमे या कार्यवाहीयों की देख रेख करना ।
  • तहसीलदार के प्रभार में रखी गई सभी सरकारी धन और सम्पति की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी तहसीलदार की ही होती है।
  • अपनी तहसील में भूमि रिकॉर्ड नियमों के अनुसार भूमि रिकॉर्ड के काम की निगरानी एवं परीक्षण करना।
  • तहसीलदार का काम कानूनगो एवं लेखपाल द्वारा किये गए कार्यों को निरीक्षण करने का भी होता है की उनके द्वारा भूमि रिकॉर्ड नियमों का पालन करते हुए किया गया है या नहीं।
  • तहसील में होने वाले सभी प्रकार के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक गतिविधियों को ठीक से क्रियान्वित करने के लिए जिला अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी के संपर्क में रहना।
  • एक Tehsildar डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर एवं सब डिविजनल ऑफिसर के दिशा निर्देशन में एक कार्यकारी अधिकारी के तौर पर भी कार्य करता है। इनमें राजस्व, सामन्य प्रशासन, कृषि विभाग, कानून व्यवस्था एवं अपराध से जुड़े सभी मामले शामिल हैं।

शैक्षिक योग्यता एवं उम्र (Education Qualification and age to become Tehsildar):

जहाँ तक Tehsildar बनने के लिए शैक्षिक योग्यता की बात है यह राज्यों के आधार पर अलग अलग भी हो सकती है। लेकिन आम तौर पर तहसीलदार बनने के लिए निम्नलिखित शैक्षिक योग्यता मांगी जाती है।

  • उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी की किसी भी विषय में पास की हुई डिग्री होनी चाहिये।
  • ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने कानून की डिग्री प्राप्त की होती है अनेक रिक्तियों में उन्हें वरीयता दी जाती है।
  • सामान्य श्रेणी से सम्बंधित उम्मीदवार की उम्र 18-40 वर्ष मांगी जाती है।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति इत्यादि के लिए तीन सालों की छूट के साथ यह सीमा 18-43 तक हो सकती है।
  • शारीरिक रूप से अपंग लोगों के लिए दो वर्षों की छूट के साथ आयु सीमा 18-42 हो सकती है।

 तहसीलदार कैसे बनें (How to Become a Tehsildar in Hindi):

यद्यपि भारत जैसे देश जहाँ बेरोजगारी अपनी चरम सीमा पर है में Tehsildar बनना कोई आसान कार्य बिलकुल नहीं है। क्योंकि वर्तमान में सरकारी नौकरी पाने एवं बेरोजगारी के चलते चपरासी पद के लिए भी डिग्री प्राप्त लोग आवेदन कर रहे हैं। जिसके चलते देश में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है इसलिए भारत में किसी भी व्यक्ति के लिए तहसीलदार बनना आसान कार्य तो बिलकुल नहीं है,लेकिन असम्भव भी नहीं है। जिस तरह से सरकार सरकारी नौकरीयों की चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की ओर कदम बढ़ा रही है उससे तो यही लगता है की आने वाले समय में हमारे देश भारतवर्ष को एक योग्य नौकरशाही मिल पायेगी। खैर उपर्युक्त वाक्य में हम Tehsildar बनने के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता एवं उम्र सीमा की बात तो कर चुके हैं। लेकिन अब भी सवाल यही उठता है की कोई व्यक्ति तहसीलदार कैसे बन सकता है। तो यहाँ पर हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं की जब किसी राज्य को तहसीलदार की आवश्यकता होती है तो उस राज्य का सर्विस सिलेक्शन कमीशन इसके लिए विज्ञापन जारी करता है। जिसमें वे योग्य और इच्छुक लोगों से एक निर्धारित तिथि तक आवेदन जमा करने के लिए कहते हैं। यद्यपि एक आकंडे के मुताबिक भारत में 50% तहसीलदारों की नई नियुक्ति होती है तो वहीँ 50% तहसीलदार प्रमोशन होकर तहसीलदार बनते हैं। इसलिए ऐसे लोग जो Tehsildar बनना चाहते हैं। उन्हें एक बात का अवश्य ध्यान रखना होगा की वे सिर्फ तहसीलदार की रिक्तियों पर ही आवेदन न करें बल्कि जब कोई विज्ञापन जिसमें नायब तहसीलदार की भर्तीयों का जिक्र हो उसके लिए भी आवेदन करें। क्योंकि जब व्यक्ति नायब तहसीलदार बन जायेगा तो एक न एक दिन वह प्रमोशन होकर तहसीलदार भी बन ही जायेगा।

तहसीलदार की चयन प्रक्रिया (Selection process of Tehsildar):

तहसीलदार की चयन प्रक्रिया को निम्नलिखित तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है इनमें पहला स्क्रीनिंग टेस्ट, दूसरा मुख्य परीक्षा एवं तीसरा इंटरव्यू होता है।

1. स्क्रीनिंग टेस्ट:

इस स्क्रीनिंग टेस्ट के दौरान यही पता लगाने का प्रयास किया जाता है की उम्मीदवार मुख्य परीक्षा देने के काबिल है या नहीं। Tehsildar के लिए यह स्क्रीनिंग टेस्ट दो घंटों का होता है इन दो घंटों में उम्मीदवारों से सामान्य ज्ञान से सम्बंधित लगभग 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। उम्मीदवारों द्वारा स्क्रीनिंग टेस्ट में प्राप्त अंकों की गणना फाइनल मेरिट निर्धारण में भी की जाती है।

2. मुख्य परीक्षा:

स्क्रीनिंग टेस्ट में पास हुए अभ्यर्थियों अर्थात स्क्रीनिंग टेस्ट में योग्य घोषित हुए उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए बुलाया जाता है। इस मुख्य परीक्षा के चार पेपर होते हैं। और अभ्यर्थी को ये सभी चारों विषयों को पास करना होता है। इस मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंक ही उम्मीदवारों की फाइनल रैंकिंग निर्धारित करेगी।

3. पर्सनल इंटरव्यू:

जो उम्मीदवार अपनी योग्यता के आधार पर मुख्य परीक्षा में पास होंगे उन्हें पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। आम तौर पर लिखित परीक्षा के परिणामों को माध्यम बनाकर पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाये जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या विज्ञप्ति में जारी कुल रिक्तियों की संख्या के तिगुनी होती है । और उम्मीदवार द्वारा इन तीनों चरणों में प्राप्त अंक ही उम्मीदवार की फाइनल मेरिट निर्धारित करते हैं ।

उपर्युक्त जानकारी से स्पष्ट है की Tehsildar बनने के लिए उम्मीदवार को स्क्रीनिंग टेस्ट, मुख्य परीक्षा एवं पर्सनल इंटरव्यू में अव्वल स्थान प्राप्त करना होता है।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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