घर खरीदने से पहले ध्यान देने योग्य बातें।

रोटी, कपड़ा और मकान मानव जीवन में नितांत आवश्यकताओं की लिस्ट में शामिल है क्योंकि किसी भी मनुष्य को अपना जीवन यापन करने के लिए कम से कम रोटी, कपड़ा एवं मकान तो चाहिए ही चाहिए। लेकिन वर्तमान में संयुक्त परिवारों के विघटन, जनसँख्या वृद्धि, ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अधिक अवसर न होने के कारण भारतवर्ष की एक बड़ी आबादी किराये के मकानों में निवास करती है। और किराये के मकानों में निवास करने वाली इस बड़ी आबादी का एक ही सपना होता है की जिस शहर में वे अपनी कमाई कर पाने में समर्थ हैं। क्या कभी उनका उस शहर में अपना घर हो पायेगा। इसी सपने को पालते हुए एक परिवार के सभी सदस्य कमाई करने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं ताकि वे स्वयं का घर खरीद सकें। कहने का आशय यह है की घर खरीदना भी पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी हुई प्रक्रिया है। और यदि घर खरीदने से पहले कोई भी व्यक्ति यहाँ पर बताई गई बातों पर ध्यान दे, तो वह न सिर्फ अपनी मेहनत से कमाई हुई कमाई से घर खरीद पायेगा बल्कि इस तरह की डील में होने वाले विभिन्न धोखों से भी अपने आपको सुरक्षित रख पायेगा। घर खरीदने में अपनाई जाने वाली सावधानियों से भले ही व्यक्ति की सीधे तौर पर कमाई न होती हो, लेकिन सावधानियों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपनी वर्षों से कमाई हुई मेहनत की कमाई को सुरक्षित ढंग से घर खरीदने के कार्य में निवेश करने में सफल होगा। इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से घर खरीदने से पहले किन किन बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक होता है के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे।

प्रॉपर्टी का इतिहास जानें:

घर खरीदने से पहले जो घर आप खरीदने जा रहे हों उसके इतिहास के बारे में जानने की कोशिश करें। यदि आप किसी रिहायशी इलाके में कोई बना बनाया हुआ घर खरीदना चाहते हैं तो उसे खरीदने से पहले उसके आस पास स्थित लोगों से पूछताछ अवश्य करें। और सिर्फ एक दो व्यक्तियों से पूछताछ के बाद ही कोई निर्णय न लें, बल्कि अधिक से अधिक लोगों से पूछताछ करने की कोशिश करें और फिर मूल्यांकन करें की उन सबके द्वारा कही गई बातों में क्या क्या समानताएं हैं। क्योंकि कहीं ऐसा न हो की आप अपनी मेहनत से कमाई हुई कमाई को किसी विवादास्पद घर पर खर्च करके अपने आपको मुसीबत में डाल लें।     

उसी तरह की प्रॉपर्टी का मार्किट प्राइस पता करें:

जो घर व्यक्ति खरीदना चाहता हो उसे घर खरीदने से पहले चाहिए की वह उसी तरह के अन्य दो तीन घरों की मार्किट प्राइस पता करे। इसके लिए व्यक्ति को जिस एरिया में वह घर खरीदना चाहता हो उसी एरिया में पिछले तीन चार महीनों में उसी तरह के बाइक हुए घरों के बारे में पता करना होगा की वे कितने में बिके। इसके अलावा व्यक्ति चाहे तो कुछ हाउसिंग कम्पनियों द्वारा प्रदान किये जाने वाले ऑनलाइन प्रॉपर्टी वैल्यूएशन टूल का भी इस्तेमाल उसी एरिया में उसी तरह के घर की मार्किट प्राइस जानने के लिए कर सकता है।   

प्रोजेक्ट Rera के तहत रजिस्टर है या नहीं:

यदि आप कोई फ्लैट या अपार्टमेंट खरीदना चाहते हैं तो यह जानने की कोशिश अवश्य करें की जिस प्रोजेक्ट में आप निवेश कर रहे हैं वह प्रोजेक्ट Rera के तहत रजिस्टर है की नहीं। क्योंकि वर्तमान में कोई भी चाहे वह कमर्शियल प्रोजेक्ट हो या फिर रेजिडेंशियल का Rera के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। और वर्तमान नियम के मुताबिक Rera के अंतर्गत रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट को समय पर पूरा होना नितांत आवश्यक है यदि ऐसा नहीं होता है तो बिल्डर को पूरे प्रोजेक्ट के कीमत की 10%  तक पेनल्टी लग सकती है। इसलिए फ्लैट या अपार्टमेंट खरीदने से पहले यह अवश्य चेक कर लें की प्रोजेक्ट रेरा के तहत रजिस्टर है की नहीं, ताकि आप समय से अपने घर में प्रवेश कर सकें।    

उस प्रॉपर्टी पर कोई अदालती या कानूनी मामला तो नहीं चल रहा:

घर खरीदने से पहले यह भी अवश्य चेक कर लें की कहीं उस पर पहले से कोई अदालती या कानूनी मामला तो नहीं चल रहा है। क्योंकि आदलती या कानूनी मामलों को निबटने में एक लम्बा समय लग जाता है इसलिए ऐसा घर बिलकुल भी नहीं खरीदें जो पहले से कानूनी पचड़े में फंसा हुआ हो।   

विरासत में मिली सम्पति की खरीद करने पर भी वेरीफाई करें:

यदि आप कोई ऐसा घर खरीद रहे हैं तो किसी व्यक्ति को विरासत में मिला हो तो उसके लिए Succession Certificate इत्यादि अवश्य चेक कर लें। इसके अलावा आप चाहें तो सेल डीड में indeminity Clause इस्तेमाल कर सकते हैं। ताकि भविष्य में उस सम्पति या घर से सम्बंधित किसी भी प्रकार का विवाद उजागर होने पर नियम एवं शर्तों के मुताबिक विक्रेता से क्षतिपूर्ति की जा सके।    

कोई वैधानिक बिल टैक्स इत्यादि लंबित तो नहीं है:

ध्यान रहे घर खरीदने से पहले विक्रेता से यह पहले ही पता कर लें की उस पर किसी प्रकार का कोई बिल एवं टैक्स लंबित न हो । इसके लिए आप चाहें तो स्थानीय बिजली, पानी कार्यालय एवं नगर पालिका नगर निगम से संपर्क करके इस बात की जानकारी ले सकते हैं। कहीं ऐसा न हो की घर खरीदने के बाद पहले से बकाया बिल, टैक्स इत्यादि सब कुछ आपको ही भरना पड़ जाय।  

उस सम्पति पर कोई ऋण तो नहीं चल रहा:

घर खरीदने से पहले व्यक्ति को इस बात का भी पता अवश्य करना चाहिए की उस सम्पति पर पहले से कोई ऋण तो नहीं चल रहा है। हालांकि इसका पता लगाने का सीधा एवं सरल सा तरीका यही है की वह विक्रेता से इस बारे में सीधे तौर पर पूछे और यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। तो व्यक्ति उस एरिया में स्थिति नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी एवं बैंक में जाकर इस बारे में पता कर सकता है।   

रिकॉर्ड गवर्मेंट पोर्टल के माध्यम से वेरीफाई करें:

वर्तमान में खतौनी, स्वामित्व की डिटेल्स इत्यादि विभिन्न गवर्नमेंट पोर्टल के माध्यम से आसानी से चेक की जा सकती हैं। इसलिए व्यक्ति चाहे तो विक्रेता से प्रॉपर्टी की डिटेल्स लेकर उसे ऑनलाइन विभिन्न गवर्मेंट पोर्टल के माध्यम से सत्यापित कर सकता है। की कहीं उसके साथ किसी प्रकार का कोई धोखा तो नहीं हो रहा है।   

दूसरा वेरिफिकेशन के लिए किसी वकील को नियुक्त करें:

ध्यान रहे घर खरीदने से पहले उपर्युक्त बताई गई बातों का ध्यान रखकर व्यक्ति को खुद तो चीजों को सत्यापित करना ही चाहिए। लेकिन एक आम इन्सान को प्रॉपर्टी के मामलों की सही जानकारी या प्रक्रिया पता नहीं होती इसलिए बेहतर यही होता है की घर खरीदने से पहले किसी वकील को नियुक्ति कर लें। जो उस प्रॉपर्टी का सत्यापन संसोधित कानून एवं नियमों के आधार पर करेगा।   

प्रॉपर्टी के एरिया को दस्तावेजों में दिए गए रिकॉर्ड के आधार पर मापें:

घर खरीदने से पहले जो एरिया विक्रेता द्वारा आपको बताया जा रहा हो उसकी पुष्टि अवश्य कर लें। उसकी पुष्टि के लिए आपको घर के एरिया को मापना होगा।  

रजिस्ट्री इत्यादि शुल्क का भुगतान कौन करेगा पहले तय कर लें :

घर खरीदने से पहले यह भी अवश्य तय कर लें की घर की रजिस्ट्री के शुल्क का भुगतान किसे करना है आम तौर पर खरीदार ही रजिस्ट्री शुल्क का भुगतान करते हैं। लेकिन बहुत सारी स्थितियों में क्रेता एवं विक्रेता दोनों आधे आधे शुल्क का भुगतान करते हैं। इसलिए आप यह पहले तय करे लें की इसका भुगतान किस प्रकार से होगा, क्योंकि रजिस्ट्री पर लगने वाली धनराशी भी कोई कम धनराशि नहीं होती है।   

मेंटेनेंस शुल्क के बारे में पता करें:

यदि आप फ्लैट या अपार्टमेंट ले रहे हैं तो घर खरीदने से पहले मेंटेनेंस शुल्क के बारे में अवश्य बात करें। उनसे जानें की मेंटेनेंस शुल्क कितना है? और इसका भुगतान कैसे करना है अर्थात हर महीने में करना है, तिमाही में करना है, छमाही में करना है या फिर सालाना। जब आप इन सब बातों के बारे में पता करेंगे तभी आप इस बात का निर्णय ले पाएंगे की नए घर के खर्चों को वहन करने की क्षमता आप में है या फिर नहीं।   

कार पार्किंग, लिफ्ट पानी इत्यादि के बारे में पता करें:

कुछ बिल्डर या डेवलपर कार पार्किंग के लिए एक्स्ट्रा चार्ज करते हैं इसलिए पहले से ही पता करें की कार पार्किंग है या नहीं, यदि है तो कितनी? यदि नहीं है तो आप इस बात का निर्णय ले पाएंगे की आपको इसकी आवश्यकता है या नहीं। इसके अलावा लिफ्ट और पानी की व्यवस्थाओं के बारे में भी अवश्य पूछें। 

वास्तु के हिसाब से चेक करें:

यदि आप वस्तु शाश्त्र में विश्वास करते हैं तो किसी वास्तु विशेषज्ञ को बुलाकर चेक करवा लें की उस घर में किचन से लेकर मंदिर तक सब कुछ वस्तु के हिसाब से ही निर्मित है की नहीं।

यह भी पढ़ें

About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *